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    पटना की गलियों से निकलकर लंदन तक का सफर, अनिल अग्रवाल की कहानी फिल्मी पटकथा से कम नहीं

    पटना की गलियों से निकलकर लंदन के स्टॉक एक्सचेंज तक का सफर तय करने वाले अनिल अग्रवाल की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल आज दुनिया के सबसे बड़े मेटल टाइकून में से एक हैं, लेकिन उनकी शुरुआत एक कबाड़ कारोबारी (Scrap Dealer) के रूप में हुई थी।

    पटना से मुंबई: सिर्फ एक टिफिन बॉक्स और बड़े सपने

    अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना के एक मध्यमवर्गीय मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके पिता एल्यूमीनियम कंडक्टर का छोटा व्यवसाय करते थे। अनिल ने 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया और 19 साल की उम्र में करियर की तलाश में मुंबई आ गए। उस वक्त उनके पास केवल एक टिफिन बॉक्स और आंखों में बड़े सपने थे।

    कबाड़ के धंधे से शुरुआत

    मुंबई आने के बाद उन्होंने 1970 के दशक में स्क्रैप मेटल (कबाड़) का काम शुरू किया। वे अन्य राज्यों की केबल कंपनियों से स्क्रैप इकट्ठा करते थे और उसे मुंबई के बाजारों में बेचते थे। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 1976 में कर्ज लेकर शमशेर स्टर्लिंग कॉरपोरेशन नाम की एक बीमार कंपनी का अधिग्रहण किया।


    9 बार मिली असफलता, डिप्रेशन से लड़ा मुकाबला

    अग्रवाल की सफलता की राह में कांटों की कमी नहीं थी। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बताया है:

    • लगातार असफलता: उन्होंने अपनी पहली सफलता से पहले 9 अलग-अलग बिजनेस शुरू किए, लेकिन वे सभी बुरी तरह फेल हो गए।
    • मानसिक संघर्ष: विफलता के उस दौर में वे इतने निराश हो गए थे कि कई सालों तक डिप्रेशन का शिकार रहे। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं थे।
    • 10वां प्रयास: लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका 10वां प्रयास स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के रूप में सफल रहा, जिसने उनके भाग्य को हमेशा के लिए बदल दिया।

    मेटल किंग बनने का सफर

    1986 में उन्होंने जेली-फिल्ड केबल्स बनाने के लिए स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की नींव रखी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा:

    1. सरकारी कंपनियों का अधिग्रहण: 2001 में उन्होंने भारत की पहली निजीकृत सरकारी कंपनी BALCO का अधिग्रहण किया। बाद में उन्होंने हिंदुस्तान जिंक को भी खरीदा।
    2. लंदन स्टॉक एक्सचेंज: 2003 में वे अपनी कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) पर लिस्ट कराने वाले पहले भारतीय बने।
    3. विविध कारोबार: आज वेदांता ग्रुप जिंक, कॉपर, एल्यूमीनियम, तेल और गैस के साथ-साथ अब सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी कदम रख चुका है।

    सफलता का मंत्र: ‘एक-चौथाई सिद्धांत’

    अनिल अग्रवाल युवाओं को ‘One Quarter Theory’ का मंत्र देते हैं। उनका मानना है कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती। किसी भी काम में माहिर होने के लिए आपको उसे हिस्सों में बांटकर धैर्य के साथ सीखना होता है। आज वे अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा दान करने की घोषणा कर चुके हैं।

    “अगर आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो छोटे से शुरुआत करने में कभी मत हिचकिचाइए। कबाड़ बेचना बुरा नहीं था, लेकिन वहीं रुक जाना बुरा होता।” — अनिल अग्रवाल

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