पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और ‘यू-टर्न’ का रिश्ता अब इतना पुराना हो चुका है कि क्रिकेट जगत के लिए यह कोई नई बात नहीं रह गई है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के खिलाफ खेलने को लेकर मोहसिन नकवी का हालिया फैसला उसी पुरानी पटकथा का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत एशिया कप 2023 के दौरान हुई थी।
एशिया कप 2023: ‘हाइब्रिड मॉडल’ की पहली हार
इस ड्रामे की नींव तब पड़ी थी जब भारत ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था। उस वक्त पीसीबी ने धमकी दी थी कि अगर एशिया कप पाकिस्तान से बाहर हुआ, तो वे टूर्नामेंट नहीं खेलेंगे। नतीजा क्या हुआ? पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े और ‘हाइब्रिड मॉडल’ स्वीकार करना पड़ा, जिसमें भारत के सभी मैच श्रीलंका में हुए।
वनडे वर्ल्ड कप 2023: धमकी से मैदान तक
यही कहानी 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी दोहराई गई। तत्कालीन पीसीबी प्रमुख जका अशरफ और पाक सरकार ने बार-बार कहा कि “अगर भारत हमारे यहाँ नहीं आया, तो हम भी भारत नहीं जाएंगे।” लेकिन अंत में, पाकिस्तान की टीम न केवल भारत आई, बल्कि अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 1.3 लाख दर्शकों के सामने मैच भी खेला।
टी20 वर्ल्ड कप 2026: वही ढाक के तीन पात
इस बार का विवाद बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा किया गया। पाकिस्तान ने फिर से ‘बॉयकॉट’ का कार्ड खेला, लेकिन ICC के सख्त रुख और वित्तीय प्रतिबंधों की आहट ने उन्हें हकीकत का आइना दिखा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पीसीबी का यह व्यवहार अब एक पैटर्न बन चुका है:
- पहले घरेलू दबाव में बड़ी-बड़ी धमकियाँ देना।
- फिर ‘क्रिकेट की भावना’ और ‘मित्र देशों की अपील’ का बहाना बनाना।
- अंत में ICC और भारत के प्रभाव के आगे झुक जाना।
पाकिस्तान की इस मजबूरी के 3 बड़े कारण:
- खस्ताहाल अर्थव्यवस्था: पाकिस्तान की चरमराती आर्थिक स्थिति में ICC से मिलने वाला फंड संजीवनी जैसा है, जिसे वे खोने का जोखिम नहीं ले सकते।
- भारतीय बाजार का दबदबा: ब्रॉडकास्टर्स और स्पॉन्सर्स के लिए भारत-पाक मैच ही सबसे बड़ा मुनाफे का सौदा है।
- खिलाड़ियों का करियर: टूर्नामेंट का बहिष्कार करने पर पाकिस्तानी खिलाड़ियों के वैश्विक करियर पर संकट मंडराने लगता है।
पाकिस्तान के लिए क्रिकेट अब खेल कम और राजनीति का जरिया ज्यादा बन गया है, लेकिन हर बार उनका ‘यू-टर्न’ यह साबित करता है कि वैश्विक क्रिकेट में भारत और आईसीसी के बिना उनका अस्तित्व बचा पाना नामुमकिन है।


