प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलयेशिया यात्रा केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है। कुआलालंपुर में पीएम मोदी ने तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फिसन (Phison Electronics) के CEO केएस पुआ से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद भारत में चिप निर्माण और स्थानीय तकनीक को लेकर उत्साहजनक संभावनाएं उभरी हैं।
केवल फैक्ट्री नहीं, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर है लक्ष्य
मुलाकात के बाद केएस पुआ ने प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिसन का उद्देश्य भारत में केवल निवेश करना या फैक्ट्री लगाना नहीं है, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। बातचीत के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
- स्थानीय प्रतिभा का विकास: फिसन भारत के स्थानीय टैलेंट को सिलिकॉन, फर्मवेयर, सॉफ्टवेयर और AI सॉल्यूशन डिजाइन करने में प्रशिक्षित करेगी।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: कंपनी अपनी कोर टेक्नोलॉजी को भारत को हस्तांतरित (Transfer) करने के लिए तैयार है।
- भारतीय इकोसिस्टम: केएस पुआ का मानना है कि कुछ ही वर्षों में भारत का अपना ‘सेमीकंडक्टर क्लस्टर’ होगा, जहाँ तकनीक पूरी तरह से भारतीय कंपनियों की और स्थानीय होगी।
पीएम मोदी का ‘सेमीकंडक्टर सपना’
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) जैसी वैश्विक पहलों के साथ जोड़कर एक मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव रखी है। केएस पुआ के अनुसार, पीएम मोदी का सपना भारत में एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जो दुनिया की बड़ी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय खुद तकनीक विकसित करे।
इस सहयोग से न केवल भारत में ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को गति मिलेगी, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता भी कम होगी।


