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    इस्लामाबाद में आत्मघाती हमला: मास्टरमाइंड और 3 सहयोगी गिरफ्तार, भारत पर उठे थे सवाल

    पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया है कि उन्होंने इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले के मास्टरमाइंड और उसके तीन सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उन बयानों पर सवाल उठने लगे हैं, जिनमें उन्होंने इस आतंकी घटना के लिए बाहरी ताकतों और पड़ोसी देशों को जिम्मेदार ठहराया था।

    गिरफ्तारी और ऑपरेशन का विवरण

    पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने एक संयुक्त अभियान के दौरान इस्लामाबाद के बाहरी इलाके से इन आतंकियों को दबोचा।

    • मास्टरमाइंड की पहचान: पकड़े गए मुख्य आरोपी का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के एक सक्रिय गुट से बताया जा रहा है।
    • बरामदगी: पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक, सुसाइड जैकेट के पुर्जे और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं, जिनसे भविष्य में होने वाले अन्य हमलों की साजिश का खुलासा हुआ है।
    • कबूलनामा: सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने स्वीकार किया है कि वे स्थानीय स्लीपर सेल्स की मदद से राजधानी में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।

    ख्वाजा आसिफ का ‘झूठ’ बेनकाब

    इस गिरफ्तारी ने पाकिस्तान सरकार, विशेषकर रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को असहज स्थिति में डाल दिया है।

    • आरोप बनाम हकीकत: हमले के तुरंत बाद ख्वाजा आसिफ ने बिना किसी ठोस सबूत के भारत और अफगानिस्तान पर उंगली उठाई थी। उन्होंने दावा किया था कि यह हमला “विदेशी साजिश” का हिस्सा है।
    • स्थानीय जड़ें: अब मास्टरमाइंड के पकड़े जाने और उसके पाकिस्तानी मूल के होने की पुष्टि के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद की जड़ें पाकिस्तान के भीतर ही मौजूद हैं।
    • विपक्ष का हमला: इमरान खान की पार्टी PTI और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अपनी सुरक्षा विफलताओं को छिपाने के लिए हमेशा बाहरी देशों पर दोष मढ़ती है, जबकि आतंकी उनके नाक के नीचे पल रहे हैं।

    सुरक्षा स्थिति और चुनौतियां

    इस्लामाबाद में हुई इस गिरफ्तारी के बावजूद पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के बाद अब राजधानी में आतंकियों की मौजूदगी ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी ‘अच्छे और बुरे’ आतंकी वाली नीति नहीं छोड़ता, तब तक ऐसे आंतरिक हमले रुकने वाले नहीं हैं।

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