बांग्लादेश में एक बार फिर घातक निपाह वायरस (Nipah Virus) ने दस्तक दी है, जिससे साल 2026 की पहली मौत दर्ज की गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसकी पुष्टि करते हुए दक्षिण एशिया के देशों के लिए अलर्ट जारी किया है।
मौत की पुष्टि और WHO की रिपोर्ट
WHO के अनुसार, उत्तरी बांग्लादेश के राजशाही डिवीजन (Naogaon जिला) में एक महिला की इस वायरस से मौत हो गई है।
- संक्रमण का कारण: महिला ने कच्चा खजूर का रस (Raw Date Palm Sap) पिया था, जो चमगादड़ों के मल या लार से दूषित था।
- लक्षण: महिला में 21 जनवरी को बुखार और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखे थे, जो बाद में गंभीर दिमागी सूजन (Encephalitis), अत्यधिक लार निकलने और दौरे पड़ने में बदल गए। 29 जनवरी को लैब जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई और एक सप्ताह के भीतर उनकी मृत्यु हो गई।
- संपर्क ट्रेसिंग: राहत की बात यह है कि महिला के संपर्क में आए सभी 35 लोगों की रिपोर्ट फिलहाल नेगेटिव आई है, जिससे सामुदायिक प्रसार (Community Spread) का खतरा फिलहाल कम लग रहा है।
मोहम्मद यूनुस सरकार के सामने चुनौतियां
प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के लिए यह स्वास्थ्य संकट एक बड़ी परीक्षा है।
- निगरानी और नियंत्रण: स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। सरकार कच्चे खजूर के रस के सेवन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चला रही है।
- आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता: बांग्लादेश वर्तमान में राजनीतिक संक्रमण और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना और महामारी को फैलने से रोकना यूनुस सरकार के लिए बड़ी प्राथमिकता है।
- टीकाकरण और इलाज: वर्तमान में निपाह के लिए कोई स्वीकृत टीका या दवा उपलब्ध नहीं है, जिससे केवल सहायक उपचार (Supportive Care) ही एकमात्र विकल्प है।
भारत पर प्रभाव और अलर्ट
बांग्लादेश में संक्रमण का मामला सामने आने के बाद भारत, विशेषकर पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट है।
- जनवरी 2026 में ही पश्चिम बंगाल के बारासात में दो स्वास्थ्य कर्मियों में निपाह की पुष्टि हुई थी।
- सीमावर्ती इलाकों में हवाई अड्डों और बॉर्डर क्रॉसिंग पर स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चमगादड़ों की आवाजाही सीमाओं को नहीं मानती, इसलिए भारत के सीमावर्ती जिलों में खतरा बना रहता है।
बचाव के उपाय:
- गिरे हुए फलों को न खाएं।
- कच्चे खजूर के रस का सेवन बिल्कुल न करें, इसे उबालकर ही पिएं।
- संदिग्ध मरीजों के सीधे संपर्क में आने से बचें और मास्क का प्रयोग करें।


