मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘आशा’ ने आज, 7 फरवरी 2026 को पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। आशा दूसरी बार मां बनी है, जो भारत की जलवायु और वातावरण में चीतों के पूरी तरह ढलने का एक बड़ा प्रमाण है।
गौरवशाली उपलब्धि और बढ़ती संख्या
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खुशखबरी को साझा किया। इन पांच नन्हे मेहमानों के आने के साथ ही भारत में जन्में और जीवित बचे शावकों की संख्या अब 24 हो गई है। यह भारतीय धरती पर चीतों का आठवां सफल लिटर (प्रसव) है।
इस महत्वपूर्ण बढ़त के बाद, कूनो और भारत में चीतों की कुल आबादी अब 35 तक पहुंच गई है।
प्रोजेक्ट चीता को मिली नई उड़ान
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट चीता’ अब अपने सबसे सफल दौर में है। विशेषज्ञों का मानना है कि आशा का दोबारा मां बनना और एक साथ पांच शावकों का जन्म देना यह दर्शाता है कि कूनो का ईकोसिस्टम इन विदेशी मेहमानों के लिए अब एक आदर्श घर बन चुका है।
टीम की मेहनत का फल
इस सफलता का श्रेय कूनो के समर्पित फील्ड स्टाफ, वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों को जाता है, जो दिन-रात इन जीवों की निगरानी और देखभाल में जुटे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस उपलब्धि को मध्य प्रदेश और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया है।
आशा और उसके पांचों शावक फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ हैं और विशेषज्ञों की सतत निगरानी में हैं। यह क्षण न केवल संरक्षण की दृष्टि से, बल्कि भारत की जैव विविधता को पुनर्जीवित करने के संकल्प की जीत है।


