भारत और अमेरिका के बीच शनिवार को जारी संयुक्त बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। जहां सत्ता पक्ष (भाजपा) इसे “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बता रहा है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे “अधूरा और अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ” करार दिया है।
यहाँ इस समझौते पर विभिन्न पक्षों की प्रमुख प्रतिक्रियाएं दी गई हैं:
कांग्रेस: “हाउडी मोदी पर भारी पड़ा नमस्ते ट्रंप”
कांग्रेस ने समझौते की आलोचना करते हुए इसे “फादर ऑफ ऑल डील्स” (Father of All Deals) मानने से इनकार कर दिया है।
- जयराम रमेश का कटाक्ष: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि “गले मिलने वाली कूटनीति” (Hugging Diplomacy) का भारत को कोई खास लाभ नहीं हुआ। उन्होंने टिप्पणी की कि ‘हाउडी मोदी’ पर ‘नमस्ते ट्रंप’ भारी पड़ गया है और “दोस्त-दोस्त न रहा” (फिल्म संगम का गाना)।
- रूस से तेल पर सवाल: कांग्रेस ने दावा किया कि समझौते के तहत भारत ने अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति दी है, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर चोट है।
- किसानों के हितों की चिंता: पार्टी ने आरोप लगाया कि भारत, अमेरिकी किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए आयात शुल्क कम कर रहा है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है।
भाजपा और सरकार: “निर्यात और रोजगार का नया युग”
सरकार और भाजपा नेताओं ने इस समझौते को प्रधानमंत्री मोदी की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है।
- राजनाथ सिंह (रक्षा मंत्री): उन्होंने इसे भारत की आर्थिक यात्रा का एक रणनीतिक मील का पत्थर बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह समझौता निर्यात के अवसरों का विस्तार करेगा, श्रम-प्रधान क्षेत्रों (टेक्सटाइल, चमड़ा आदि) को मजबूत करेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।
- पीयूष गोयल (वाणिज्य मंत्री): गोयल ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब भारतीय सामानों पर टैरिफ 25-50% से घटाकर 18% कर देगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बाजार मिलेगा।
- निर्मला सीतारमण (वित्त मंत्री): उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय मध्यम और लघु उद्योगों (MSMEs) के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का सुनहरा अवसर है।
व्यापार समझौते के मुख्य बिंदु जिन पर विवाद और चर्चा है:
| पक्ष | सरकार का तर्क | विपक्ष का आरोप |
| टैरिफ (Tariff) | अमेरिका भारत पर टैरिफ घटाकर 18% करेगा। | भारत को इसके बदले 500 अरब डॉलर का सामान खरीदना होगा। |
| ऊर्जा (Energy) | ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका से तेल-गैस की खरीद। | रूस से सस्ता तेल छोड़ना भारत के लिए घाटे का सौदा है। |
| कृषि (Agri) | संवेदनशील उत्पादों (गेहूं, चावल) को बचाया गया है। | डेयरी और मेवों के लिए बाजार खोलने से स्थानीय किसानों पर असर पड़ेगा। |
| नौकरियां | निर्यात बढ़ने से लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। | आईटी सेवाओं (H1-B वीजा आदि) पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। |
उद्योग जगत की राय
FICCI और CII जैसे व्यापारिक संगठनों ने इस ढांचे का स्वागत किया है। उनका मानना है कि जेनेरिक दवाओं और विमान के पुर्जों पर जीरो टैरिफ होने से भारत वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बन सकता है।


