संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान लोकसभा में जो हुआ, वह भारतीय संसदीय इतिहास की सबसे अप्रत्याशित घटनाओं में से एक माना जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्होंने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से मना किया था।
स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान
गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ने विपक्षी सांसदों के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उनके बयान की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- सुरक्षा की चिंता: स्पीकर ने कहा कि उनके पास ऐसी पुख्ता जानकारी थी कि सदन के भीतर प्रधानमंत्री के साथ “कुछ भी अप्रत्याशित” (unforeseen incident) घट सकता था।
- आने से रोका: ओम बिरला ने खुलासा किया, “मैंने खुद प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे सदन में न आएं, क्योंकि जिस तरह का माहौल विपक्ष ने बनाया था, वह उनकी सुरक्षा और गरिमा के लिए जोखिम भरा हो सकता था।”
- संसदीय गरिमा का उल्लंघन: उन्होंने कल (4 फरवरी) की घटना को संसदीय लोकतंत्र पर एक ‘काले धब्बे’ के समान बताया, जहाँ विपक्षी सांसद मर्यादाओं को ताक पर रखकर ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष) की ओर बढ़ रहे थे।
ऐतिहासिक घटना: बिना पीएम के संबोधन के प्रस्ताव पारित
लोकसभा में गतिरोध इतना बढ़ गया कि 2004 के बाद यह पहली बार हुआ जब ‘राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव’ (Motion of Thanks) प्रधानमंत्री के बिना जवाब दिए ही पारित कर दिया गया।
विवाद की जड़: जनरल नरवणे की ‘मेमोयर’
पूरे विवाद के केंद्र में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब (memoir) है। राहुल गांधी इस किताब के अंशों का हवाला देते हुए चीन सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री को घेरना चाहते थे, जबकि स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए बिना पूर्व सूचना के ऐसे आरोप लगाने से मना किया था।
लोकसभा की कार्यवाही को फिलहाल शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री अब इस चर्चा का उत्तर राज्यसभा में दे सकते हैं।


