संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। 4 फरवरी 2026 को लोकसभा में भारी हंगामे के चलते न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन टल गया, बल्कि अब सूत्रों के हवाले से ‘शारीरिक हमले की साजिश’ जैसे गंभीर दावे सामने आ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार शाम 5 बजे जब प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था, तब सदन में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले।
- कुर्सी का घेराव: विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस की महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की खाली कुर्सी को चारों तरफ से घेर लिया।
- सुरक्षा में सेंध का दावा: भाजपा सांसदों और सूत्रों का दावा है कि विपक्षी सांसदों का आक्रामक रुख और वेल को पार कर ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष) की ओर बढ़ना प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता था।
- हमले की आशंका: भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों की बॉडी लैंग्वेज बहुत आक्रामक थी और वे प्रधानमंत्री पर हमला भी कर सकते थे। इसी सुरक्षा चिंता के कारण पीएम सदन में नहीं आए।
भाजपा और विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप
इस घटनाक्रम ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को और बढ़ा दिया है:
| पक्ष | प्रमुख आरोप/तर्क |
|---|---|
| भाजपा (सत्ता पक्ष) | कांग्रेस ने पीएम पर हमले की साजिश रची; लोकतंत्र के मंदिर का अपमान किया; सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर पीएम की सीट घेरी। |
| कांग्रेस (विपक्ष) | राहुल गांधी ने कहा कि “प्रधानमंत्री डरे हुए हैं” और सच का सामना नहीं करना चाहते, इसलिए सदन नहीं आए। |
विवाद की पृष्ठभूमि
यह तनाव मुख्य रूप से दो मुद्दों पर आधारित है:
- पूर्व सेना प्रमुख की किताब: राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की ‘अप्रकाशित’ यादों (memoir) का हवाला देकर चीन मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं।
- सांसदों का निलंबन: हंगामे के चलते कांग्रेस के 8 सांसदों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जिसके विरोध में विपक्षी दल ‘overnight dharna’ और प्रदर्शन कर रहे हैं।


