भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। जहाँ कांग्रेस और विपक्षी दल इस समझौते को किसानों के साथ “विश्वासघात” बता रहे हैं, वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
5 फरवरी 2026 को दिए अपने बयान में कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।
शिवराज सिंह चौहान के बयान की मुख्य बातें
कृषि मंत्री ने विपक्षी आरोपों पर पलटवार करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए:
- संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित: चौहान ने आश्वासन दिया कि भारत के मुख्य अनाज, डेयरी उत्पाद और प्रमुख फलों के बाजारों को अमेरिकी प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं खोला गया है। उन्होंने कहा, “हमने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।”
- टैरिफ में कटौती का लाभ: मंत्री ने बताया कि अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18% करने से भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास किसानों को सीधा फायदा होगा।
- विपक्ष पर तीखा हमला: उन्होंने कांग्रेस को “झूठ की मशीन” करार देते हुए कहा कि विपक्ष मानसिक रूप से परेशान है और जमीन पर मुकाबला करने में असमर्थ होने के कारण केवल भ्रम फैला रहा है।
- डिप्लोमेसी और डिग्निटी: चौहान ने इस समझौते को कूटनीति, विकास और सम्मान का नया उदाहरण बताया।
विपक्ष और किसान संगठनों के आरोप
दूसरी ओर, कांग्रेस और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस डील पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
- जीरो ड्यूटी का डर: विपक्ष का दावा है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने से भारत का बाजार विदेशी माल से भर जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों की आय तबाह हो जाएगी।
- पारदर्शिता की कमी: कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार इस “गुप्त समझौते” की पूरी जानकारी संसद में रखे।
- कॉर्पोरेट हित: किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव में आकर छोटे और सीमांत किसानों के हितों की बलि दे दी है।
सारांश तालिका: ट्रेड डील पर पक्ष-विपक्ष
| मुद्दा | सरकार का स्टैंड (शिवराज सिंह) | विपक्ष का दावा (कांग्रेस/SKM) |
|---|---|---|
| किसान सुरक्षा | मुख्य फसलें और डेयरी पूरी तरह सुरक्षित हैं। | यह किसानों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात है। |
| बाजार पहुंच | टैरिफ घटने से भारतीय निर्यात बढ़ेगा। | सस्ता अमेरिकी माल भारतीय खेती को बर्बाद कर देगा। |
| उद्देश्य | कूटनीति और विकास का नया युग। | अमेरिकी |


