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    भारत की दरियादिली का मुरीद तालिबान, पाकिस्तान को लगा बड़ा झटका

    भारत और अफगानिस्तान (तालिबान) के रिश्तों में पिछले कुछ दिनों में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। हालिया घटनाक्रमों ने न केवल पाकिस्तान को चौंका दिया है, बल्कि तालिबान शासन भारत की दरियादिली का मुरीद हो गया है।

    ​भारत ने ऐसा क्या किया?

    ​तालिबान की खुशी की मुख्य वजह भारत का केंद्रीय बजट 2026 और निरंतर भेजी जा रही मानवीय सहायता है।

    • बजट में बड़ा इजाफा: भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में अफगानिस्तान के लिए विकास सहायता (Development Aid) को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे तालिबान के लिए यह एक बड़ी संजीवनी है।
    • दवाइयों की बड़ी खेप: जनवरी 2026 में भारत ने अफगानिस्तान को 2.5 टन कैंसर रोधी दवाएं और अन्य चिकित्सा उपकरण भेजे। पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच जब अफगानिस्तान को दवाओं की किल्लत हो रही थी, तब भारत ‘संकटमोचक’ बनकर सामने आया।
    • राजनयिक मिशन का विस्तार: भारत ने काबुल में अपने ‘तकनीकी मिशन’ के दर्जे को अपग्रेड करने के संकेत दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आधिकारिक संपर्क और मजबूत हुए हैं।

    ​तालिबान क्यों कर रहा है जय-जयकार?

    ​तालिबान के कतर स्थित प्रवक्ता सुहैल शाहीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भारत के इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया है। उनके खुश होने के पीछे 3 प्रमुख कारण हैं:

    1. पाकिस्तान से दूरी: तालिबान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन और व्यापार को लेकर भारी तनाव है। ऐसे में भारत का सहयोग तालिबान को पाकिस्तान पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद करता है।
    2. मान्यता की उम्मीद: हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है, लेकिन बजट में मदद बढ़ाना तालिबान को वैश्विक पटल पर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का एक जरिया लग रहा है।
    3. बुनियादी ढांचा और विकास: तालिबान चाहता है कि भारत अफगानिस्तान में रुके हुए पुराने प्रोजेक्ट्स (जैसे सलमा बांध और संसद भवन) को फिर से शुरू करे और नया निवेश लाए।

    ​पाकिस्तान को लगा बड़ा झटका

    ​अफगानिस्तान में भारत के बढ़ते प्रभाव और तालिबान के साथ उसकी नजदीकी ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। तालिबान अब पाकिस्तान से घटिया क्वालिटी की दवाइयां लेने के बजाय भारतीय दवाओं को प्राथमिकता दे रहा है, जो सीधे तौर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ की जीत मानी जा रही है।

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