वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है। पाकिस्तान और चीन के साथ जारी सीमा विवादों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने सैन्य आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता के लिए बड़ा खाका तैयार किया है। इस बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए आवंटित राशि में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की गई है।
बजट के मुख्य बिंदु:
- भारी-भरकम आवंटन: साल 2026-27 के लिए रक्षा बजट में 8 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। रक्षा मंत्रालय के लिए कुल 78 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ी उछाल है, जो देश की सुरक्षा तैयारियों को पुख्ता करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
- सैन्य आधुनिकीकरण: रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए 21 लाख करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग राफेल लड़ाकू विमानों, नई पनडुब्बियों और अत्याधुनिक मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।
- सीमा शुल्क में छूट: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विमानों के कलपुर्जों और कच्चे माल के आयात पर मूलभूत सीमा शुल्क (Customs Duty) में छूट देने का एलान किया है। इससे रक्षा क्षेत्र की इकाइयों को रखरखाव और मरम्मत (MRO) कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी।
- चीन-पाकिस्तान चुनौती का सामना: बजट का मुख्य उद्देश्य सीमा पर पाकिस्तान और चीन की हरकतों का जवाब देने के लिए भारतीय सेना को तकनीक और हथियारों के मामले में श्रेष्ठ बनाना है। सरकार का लक्ष्य भारत की रक्षा शक्ति को और अधिक सुदृढ़ करना है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
- रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देने के लिए कई नई नीतियों का संकेत दिया गया है। रक्षा क्षेत्र के पुर्जों के निर्माण हेतु कच्चे माल पर छूट मिलने से घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।
यह बजट स्पष्ट करता है कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में केवल आयातक बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी सैन्य शक्ति का आधुनिकरण कर वैश्विक स्तर पर एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरना चाहता है। 2024-25 के बजट (6.21 लाख करोड़) के मुकाबले इस बार की 9.5% तक की वृद्धि (संशोधित अनुमानों के अनुसार) सेना की जरूरतों को प्राथमिकता देने की सरकार की नीति को दर्शाती है।


