संसद में आज पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारतीय अर्थव्यवस्था की एक मजबूत लेकिन सतर्क तस्वीर पेश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश इस रिपोर्ट में महंगाई (Inflation) और रुपये की स्थिति (Rupee Value) पर विशेष जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस साल 7.4% की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच महंगाई और मुद्रा (Currency) का उतार-चढ़ाव बड़ी चुनौतियां पेश कर रहा है।
महंगाई: राहत और जोखिम के बीच संतुलन
आर्थिक सर्वे में महंगाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी गई है।
- रिकॉर्ड गिरावट: अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान हेडलाइन मुद्रास्फीति (CPI) गिरकर 1.7% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी, जिसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में गिरावट और बेहतर मानसून था।
- FY27 के लिए अनुमान: सर्वे ने आगाह किया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। IMF और RBI के अनुमानों के अनुसार, यह 4% के आसपास रह सकती है, जो कि RBI के तय लक्ष्य के भीतर ही है।
- मुख्य कारक: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत को राहत मिलेगी, लेकिन सोना, चांदी और तांबे जैसी धातुओं की ऊंची कीमतें ‘कोर इन्फ्लेशन’ (Core Inflation) पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
रुपये की कमजोरी: ‘मुक्का मार’ प्रदर्शन पर दबाव
रुपये के मूल्य को लेकर सर्वे में एक दिलचस्प विश्लेषण दिया गया है। सर्वे के अनुसार, भारतीय रुपया अपनी वास्तविक क्षमता से कम यानी “Punching below its weight” पर कारोबार कर रहा है।
- ऐतिहासिक गिरावट: रुपया हाल ही में डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर को पार कर गया है। अमेरिकी टैरिफ (Trump Tariffs) और वैश्विक बाजारों में पूंजी की निकासी (Capital Outflows) ने रुपये पर दबाव डाला है।
- क्या यह चिंता की बात है? सर्वे का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में कमजोर रुपया भारत के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक नहीं है। यह अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में मदद करता है, जिससे भारतीय निर्यात (Exports) प्रतिस्पर्धी बने रहते हैं।
- आयातित महंगाई (Imported Inflation): रुपये के गिरने से विदेश से आने वाला सामान (जैसे कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान) महंगा हो जाता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। हालांकि, गिरती कमोडिटी कीमतों के कारण यह खतरा फिलहाल सीमित है।
- सर्वे के मुख्य आंकड़े एक नज़र में
| संकेतक (Indicator) | अनुमान/आंकड़ा |
|---|---|
| GDP ग्रोथ (FY26) | 7.4% |
| GDP ग्रोथ अनुमान (FY27) | 6.8% – 7.2% |
| राजकोषीय घाटा (FY26 Target) | 4.4% |
| मुद्रास्फीति (FY26 Avg) | ~1.8% |
| विदेशी मुद्रा भंडार | 11 महीने के आयात के बराबर |
आर्थिक सर्वेक्षण का संदेश स्पष्ट है—भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था (Domestic Demand) बहुत मजबूत है, लेकिन बाहरी झटकों (जैसे डॉलर की मजबूती और वैश्विक व्यापार युद्ध) से बचने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। सर्वे यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में RBI ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे आम आदमी के लिए लोन सस्ता हो सकता है।


