महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती के पास एक विमान हादसे में असामयिक निधन हो गया। उनके निधन से न केवल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में एक बड़ा नेतृत्व शून्य पैदा हो गया है, बल्कि उनके गृह क्षेत्र बारामती में उनकी विरासत को संभालने का सवाल भी खड़ा हो गया है।
बारामती: पवार परिवार का अभेद्य किला
बारामती विधानसभा सीट पर पिछले चार दशकों से अजित पवार का एकछत्र राज रहा है। उन्होंने यहां से लगातार 8 बार चुनाव जीता। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने ही भतीजे युगेंद्र पवार को 1 लाख से अधिक वोटों से हराकर अपनी पकड़ साबित की थी। अब सवाल यह है कि इस “दादा” की विरासत का असली वारिस कौन होगा?
दावेदारों की रेस: कौन होगा उत्तराधिकारी?
अजित पवार के अचानक जाने के बाद उत्तराधिकार की चर्चा में चार प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं:
- सुनेत्रा पवार: अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद। वे बारामती में महिला संगठनों और सामाजिक कार्यों के माध्यम से सक्रिय रही हैं। हालांकि वे 2024 का लोकसभा चुनाव सुप्रिया सुले से हार गई थीं, लेकिन अजित दादा के समर्थकों के बीच उनकी स्वीकार्यता सबसे अधिक मानी जा रही है।
- युगेंद्र पवार: अजित पवार के बड़े भाई श्रीनिवास पवार के बेटे। भले ही उन्होंने पिछला चुनाव शरद पवार गुट (NCP-SP) से लड़ा था, लेकिन परिवार में मचे इस दुखद संकट के बीच “पवार परिवार के एकीकरण” की संभावनाओं के चलते उनकी दावेदारी को नकारा नहीं जा सकता।
- पार्थ पवार: अजित पवार के बड़े बेटे। 2019 में मावल लोकसभा सीट से हारने के बाद वे सक्रिय राजनीति से थोड़े पीछे हट गए थे, लेकिन पिता की विरासत संभालने के लिए उन पर दबाव बढ़ सकता है।
- जय पवार: अजित पवार के छोटे बेटे। वे पर्दे के पीछे से बारामती की राजनीति और अजित पवार के चुनाव प्रबंधन को संभालते रहे हैं। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता एक प्लस पॉइंट हो सकती है।
अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या शरद पवार और सुप्रिया सुले, अजित दादा के गुट और परिवार को फिर से साथ लाएंगे? बारामती की जनता हमेशा से ‘पवार’ नाम के साथ खड़ी रही है। सहानुभूति की लहर और विरासत की जंग के बीच, आगामी उपचुनाव यह तय करेगा कि बारामती की कमान किसके हाथ में जाएगी।


