महाराष्ट्र की राजनीति के लिए 28 जनवरी 2026 का दिन एक गहरे काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। यह हादसा इतना भीषण था कि विमान के परखच्चे उड़ गए और पहचान करना भी मुश्किल हो गया।
चश्मदीद की जुबानी
एक स्थानीय महिला, जो इस हादसे की चश्मदीद रही, ने उस खौफनाक पल का पूरा ब्योरा दिया है। उसने बताया:
- असंतुलित लैंडिंग: “विमान बारामती हवाई पट्टी के ऊपर चक्कर काट रहा था और काफी अस्थिर लग रहा था। जब वह रनवे पर उतरने के लिए नीचे आया, तो अचानक अपना संतुलन खो बैठा और बहुत जोर से जमीन से टकराया।”
- धमाकों का सिलसिला: “टक्कर होते ही एक जोरदार धमाका हुआ और विमान आग के गोले में बदल गया। इसके बाद एक के बाद एक 4-5 धमाके और हुए। आग इतनी भीषण थी कि विमान के मलबे के टुकड़े उछलकर हमारे घरों के पास तक आ गिरे।”
- मदद की नाकाम कोशिश: चश्मदीदों ने बताया कि विमान रनवे से करीब 100 फीट की ऊंचाई पर था जब वह एक तरफ झुक गया। धमाका सुनते ही लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी के लिए भी अंदर फंसे लोगों को बचाना असंभव था।
उन ‘दो’ चीजों से हुई पहचान
हादसे के बाद शवों की स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें पहचानना चुनौतीपूर्ण हो गया था। रिपोर्टों के अनुसार, अजित पवार की पहचान उनकी दो खास चीजों से की गई:
- कलाई घड़ी (Wristwatch): अजित पवार अपनी समय की पाबंदी (Punctuality) के लिए जाने जाते थे। हादसे के बाद उनके हाथ में बंधी उनकी पसंदीदा घड़ी मलबे में मिली, जिससे उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सकी। उनके स्टाफ और परिवार ने तुरंत उस घड़ी को पहचान लिया।
- चश्मा या अन्य निजी सामान: मौके पर मौजूद सूत्रों के मुताबिक, उनके शरीर के पास से मिली अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं (संभवतः उनके विशिष्ट चश्मे या लॉकेट) ने भी फोरेंसिक टीम को उनकी पुष्टि करने में मदद की।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भी इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कल सुबह 11 बजे बारामती में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
1१


