मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद अब मेयर पद को लेकर महायुति गठबंधन (बीजेपी और शिंदे गुट) के बीच खींचतान तेज हो गई है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, बीजेपी इस बार अपना मेयर बनाने पर अड़ी है, जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
सीटों का गणित और बीजेपी का दावा
हाल ही में संपन्न हुए 227 सीटों वाले बीएमसी चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि उनकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को केवल 29 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता है, और महायुति के पास कुल 118 सीटें हैं।
चूंकि बीजेपी के पास शिंदे गुट से तीन गुना ज्यादा सीटें हैं, इसलिए पार्टी के भीतर यह प्रबल मांग है कि 45 साल में पहली बार मुंबई का मेयर बीजेपी का ही होना चाहिए।
एकनाथ शिंदे के लिए झटका क्यों?
- दबदबे की लड़ाई: शिंदे गुट ढाई-ढाई साल के रोटेशनल मेयर पद की मांग कर रहा था। लेकिन बीजेपी सूत्रों के अनुसार, पार्टी इस पर समझौता करने के मूड में नहीं है।
- कल्याण-डोंबिवली का असर: हाल ही में शिंदे ने कल्याण-डोंबिवली में बीजेपी को दरकिनार कर राज ठाकरे की मनसे से हाथ मिलाया था। माना जा रहा है कि बीजेपी अब मुंबई में कड़ा रुख अपनाकर उसका हिसाब बराबर करना चाहती है।
- वर्चस्व का अंत: मुंबई पर हमेशा से शिवसेना (अविभाजित) का कब्जा रहा है। अगर मेयर पद बीजेपी के पास जाता है, तो यह शिंदे की शिवसेना के लिए अपनी राजनीतिक जमीन खोने जैसा होगा।
कौन हैं मेयर पद की रेस में?
इस बार मुंबई का मेयर पद ‘महिला (सामान्य वर्ग)’ के लिए आरक्षित हुआ है। बीजेपी की ओर से ऋतु तावड़े, अलका केरकर और राजश्री शिरवाडकर जैसे नाम सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं, शिंदे गुट की ओर से तेजस्वी घोसालकर का नाम चर्चा में है, लेकिन कम सीटों के कारण उनका दावा कमजोर पड़ता दिख रहा है।
अगला कदम: मेयर पद का आधिकारिक चुनाव फरवरी में होने की संभावना है।


