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    वित्त मंत्री ने ‘हलवा सेरेमनी’ में भाग लिया, पहली बार रविवार को पेश होगा बजट

    भारत के बजट 2026-27 की तैयारी अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को नॉर्थ ब्लॉक में पारंपरिक ‘हलवा सेरेमनी’ में भाग लेकर इस गोपनीय प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया।

    ​यहाँ इस समारोह और बजट से जुड़ी मुख्य बातें दी गई हैं:

    ​हलवा सेरेमनी का महत्व

    ​हलवा सेरेमनी भारतीय वित्त मंत्रालय की एक दशकों पुरानी परंपरा है। इसका आयोजन बजट पेश होने से लगभग 8-10 दिन पहले किया जाता है।

    • अंतिम चरण का प्रतीक: यह रस्म दर्शाती है कि बजट के आंकड़ों और प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब इसकी छपाई (या डिजिटल फाइनल स्वरूप) का काम शुरू हो गया है।
    • टीम का सम्मान: वित्त मंत्री खुद एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाती हैं और उसे उन अधिकारियों और कर्मचारियों में बांटती हैं जो महीनों से दिन-रात बजट तैयार करने में जुटे होते हैं।
    • मीठी शुरुआत: भारतीय संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत मीठे से करने की परंपरा है, यही भाव इस समारोह का भी है।

    ​’लॉक-इन’ पीरियड: बाहरी दुनिया से संपर्क खत्म

    ​हलवा समारोह के तुरंत बाद, बजट प्रक्रिया से जुड़े लगभग 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी ‘लॉक-इन’ अवधि में चले जाते हैं।

    • गोपनीयता: ये लोग नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थित बजट प्रेस में तब तक कैद रहते हैं, जब तक कि वित्त मंत्री संसद में बजट पेश न कर दें।
    • प्रतिबंध: इस दौरान उन्हें अपने परिवार से बात करने, मोबाइल फोन इस्तेमाल करने या बाहर जाने की अनुमति नहीं होती। यह व्यवस्था बजट की संवेदनशीलता और गोपनीयता (Secrecy) बनाए रखने के लिए की जाती है।

    ​बजट 2026: प्रमुख तारीखें और समय

    ​इस साल का बजट कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है:

    • 1 फरवरी 2026 (रविवार): वित्त मंत्री सुबह 11:00 बजे अपना 9वां लगातार बजट पेश करेंगी। यह पिछले कई दशकों में पहली बार है जब बजट रविवार के दिन पेश किया जा रहा है।
    • शेयर बाजार: बजट के मद्देनजर रविवार होने के बावजूद स्टॉक एक्सचेंज (NSE और BSE) ट्रेडिंग के लिए खुले रहेंगे।
    • आर्थिक सर्वेक्षण: मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा 30 जनवरी 2026 को संसद में इकोनॉमिक सर्वे पेश किए जाने की उम्मीद है।

    ​यह बजट 2026-27 ‘डिजिटल इंडिया’ की प्राथमिकताओं और विकसित भारत के रोडमैप पर केंद्रित होने की संभावना है। 1 फरवरी को ही पता चलेगा कि आम जनता, मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स के लिए इस “पिटारे” में क्या खास है।

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