अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी है कि यदि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई या ईरान की संप्रभुता पर कोई भी हमला किया गया, तो इसे ‘पूर्ण युद्ध’ (All-out War) माना जाएगा।
अमर उजाला की रिपोर्ट और हालिया घटनाक्रमों के आधार पर इस विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा की गई किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई—चाहे वह सीमित हो या ‘सर्जिकल स्ट्राइक’—का जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा। ईरानी सेना के प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेकरची ने तो यहाँ तक कहा कि यदि उनके सर्वोच्च नेता पर आंच आई, तो वे “दुश्मन की दुनिया में आग लगा देंगे।”
2. ट्रंप का ‘आर्माडा’ और वॉर मोड
दावोस (विश्व आर्थिक मंच) से लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका का एक विशाल नौसैनिक बेड़ा (Armada), जिसमें विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln शामिल है, ईरान की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों की हत्या बंद नहीं की या परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू किया, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा।
3. विवाद की मुख्य वजहें
- आंतरिक विरोध प्रदर्शन: दिसंबर 2025 के अंत से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 5,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
- ट्रंप की ‘रेड लाइन’: ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और सामूहिक फांसी उनके लिए ‘रेड लाइन’ है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पिछली धमकियों के कारण ही ईरान ने 800 से अधिक लोगों की फांसी रोकी थी।
- परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) फिर से शुरू किया, तो उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
4. युद्ध की आशंका और वैश्विक प्रभाव
क्षेत्र में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की तैनाती ने युद्ध की आशंका बढ़ा दी है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि वे युद्ध नहीं चाहते और शांति के लिए बातचीत के द्वार खुले हैं, लेकिन ईरान का कहना है कि “उनकी उंगली ट्रिगर पर है।”
वर्तमान स्थिति: 24 जनवरी 2026 तक, मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी बेड़े की गतिविधियों पर टिकी हैं।


