भारत में फरवरी 2026 से होने वाले T20 वर्ल्ड कप के आगाज से पहले वीजा विवाद ने तूल पकड़ लिया है। टूर्नामेंट की संयुक्त मेजबानी कर रहे भारत में आने के लिए पाकिस्तानी मूल के क्रिकेटरों को वीजा मिलने में आ रही देरी ने आईसीसी (ICC) की चिंता बढ़ा दी है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद तब शुरू हुआ जब विभिन्न देशों की राष्ट्रीय टीमों में खेल रहे पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों और अधिकारियों के भारतीय वीजा आवेदन अटक गए। नियमों के अनुसार, पाकिस्तान में जन्मे व्यक्ति या पाकिस्तानी मूल के नागरिकों को भारत का वीजा मिलने में अतिरिक्त सुरक्षा जांच (Security Clearance) से गुजरना पड़ता है, जिसमें अक्सर समय लगता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल 42 खिलाड़ियों और अधिकारियों का वीजा फंसा हुआ था। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- इंग्लैंड: आदिल राशिद, रेहान अहमद और साकिब महमूद।
- USA: अली खान, शायन जहांगीर, मोहम्मद मोहसिन और अहसान आदिल।
- जिम्बाब्वे: कप्तान सिकंदर रजा (पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे)।
- अन्य: नेदरलैंड्स, कनाडा, बांग्लादेश और इटली जैसी टीमों के भी कई खिलाड़ी और स्टाफ सदस्य।
ICC ने क्या कदम उठाया?
विवाद बढ़ता देख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने तुरंत हस्तक्षेप किया है।
- राजनयिक समन्वय: ICC विभिन्न देशों में स्थित भारतीय उच्चायोगों (Indian High Commissions) के साथ सीधे संपर्क में है ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
- डेडलाइन तय: खिलाड़ियों के लिए वीजा जारी करने की अंतिम तारीख 31 जनवरी निर्धारित की गई है।
- इंग्लैंड को मिली राहत: ICC की पहल के बाद खबर है कि इंग्लैंड के आदिल राशिद, रेहान अहमद और साकिब महमूद के वीजा क्लियर हो गए हैं। साथ ही नेदरलैंड्स और कनाडा के कुछ सदस्यों को भी हरी झंडी मिल गई है।
- लगातार मॉनिटरिंग: USA, UAE और इटली जैसी टीमों के खिलाड़ियों के लिए अगले सप्ताह विशेष अपॉइंटमेंट तय किए गए हैं ताकि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले कोई तकनीकी बाधा न रहे।
क्यों हो रही है देरी?
भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण पाकिस्तानी मूल के नागरिकों की जांच गहन होती है। 2008 के मुंबई हमलों के बाद से वीजा नियमों को और सख्त किया गया है।
टी20 वर्ल्ड कप का आयोजन 7 फरवरी 2026 से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होना है।


