बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव नतीजों के बाद मुंबई की राजनीति में एक बार फिर ‘होटल पॉलिटिक्स’ की वापसी हो गई है। 16 जनवरी 2026 को घोषित परिणामों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाले महायुति गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे उद्धव ठाकरे के तीन दशक पुराने गढ़ में सेंध लग गई है।
चुनावी आंकड़े और बहुमत का समीकरण
BMC की कुल 227 सीटों में से सत्ता के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है। इस चुनाव में महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
- भाजपा: 89-90 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी)
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 29 सीटें
- कुल महायुति: 118-119 सीटें (बहुमत से अधिक)
- विपक्ष: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने लगभग 65 सीटें हासिल की हैं, जबकि कांग्रेस 24 सीटों पर सिमट गई है।
मेयर पद पर ‘पेच’ और शिंदे की शर्त
तीन दशकों में यह पहली बार है जब भाजपा का मेयर बनने की प्रबल संभावना है, लेकिन इसके लिए शिंदे गुट का समर्थन अनिवार्य है। सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे ने गठबंधन के सामने “ढाई-ढाई साल” के मेयर पद का फॉर्मूला रखा है। शिंदे गुट का तर्क है कि उनके 29 पार्षदों के बिना भाजपा बहुमत तक नहीं पहुंच सकती, इसलिए शुरुआती कार्यकाल या सम्मानजनक साझेदारी उनके लिए जरूरी है।
होटल पॉलिटिक्स की शुरुआत
पार्षदों की खरीद-फरोख्त (Poaching) और दलबदल के डर से मुंबई में फिर से रिसॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू हो गई है।
- शिंदे सेना का कदम: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के बांद्रा स्थित एक फाइव स्टार होटल (ताज लैंड्स एंड) में शिफ्ट कर दिया है।
- सतर्कता: महायुति के नेताओं को डर है कि विपक्ष या असंतुष्ट गुट बहुमत के गणित को बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
- बैठकों का दौर: उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच मेयर पद के फॉर्मूले को लेकर चर्चा जारी है।
- 1997 के बाद यह पहली बार होगा जब BMC की सत्ता से ठाकरे परिवार पूरी तरह बाहर होगा। हालांकि, भाजपा के लिए यह जीत ऐतिहासिक है, लेकिन मेयर की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता शिंदे की शर्तों और आंतरिक सौदेबाजी पर टिका है।


