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    संघर्ष की मिसाल: जन्म से नहीं थी एक आंख, दूसरी हादसे में खोई, बने बैंक मैनेजर, खेलों में रचा इतिहास

    हौसले बुलंद हों तो शारीरिक अक्षमता कभी प्रगति की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। बिहार के रहने वाले सोनू सिंह की कहानी इसी जज्बे का जीता-जागता प्रमाण है। सोनू ने न केवल अपनी दृष्टिहीनता को मात दी, बल्कि आज वे पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और एक कठिन जर्मन खेल ‘गोलबॉल’ (Goalball) में बिहार टीम की कप्तानी कर रहे हैं।

    हादसे और संघर्ष की दास्तान

    सोनू सिंह के जीवन की शुरुआत ही चुनौतियों के साथ हुई। जन्म के समय से ही उनकी एक आंख में रोशनी नहीं थी। जीवन की गाड़ी एक आंख के सहारे चल रही थी, लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। कक्षा 10 में पढ़ाई के दौरान एक खेल हादसे में उनकी दूसरी आंख की रोशनी भी चली गई। पूरी तरह दृष्टिहीन होने के बाद सोनू के सामने अंधेरा छा गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

    बैंक में डिप्टी मैनेजर तक का सफर

    सोनू ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत से बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी की। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन पंजाब नेशनल बैंक में हुआ। वर्तमान में वे नोएडा (उत्तर प्रदेश) में पीएनबी की शाखा में डिप्टी मैनेजर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

    गोलबॉल: एक कठिन जर्मन खेल में महारत

    नौकरी के साथ-साथ सोनू ने खेलों के प्रति अपना जुनून कम नहीं होने दिया। उन्होंने ‘गोलबॉल’ खेलना शुरू किया, जो मूल रूप से एक जर्मन खेल है और विशेष रूप से दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए बनाया गया है।

    क्या है गोलबॉल खेल?

    यह एक अनोखा खेल है जिसमें खिलाड़ी आंखों पर पट्टी (Blackout masks) बांधकर खेलते हैं ताकि सभी के लिए प्रतिस्पर्धा समान रहे। इसमें एक गेंद का उपयोग किया जाता है जिसके अंदर ‘घंटी’ (Bell) होती है। खिलाड़ी गेंद की आवाज़ सुनकर उसे पकड़ते हैं और गोल होने से रोकते हैं। इस खेल में एकाग्रता और सुनने की शक्ति का बहुत महत्व होता है।

    बिहार टीम के कप्तान और प्रेरणास्रोत

    सोनू सिंह आज न केवल बैंक मैनेजर हैं, बल्कि बिहार की गोलबॉल टीम के कप्तान भी हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी टीम का नेतृत्व किया है। सोनू का मानना है कि दिव्यांगता शरीर में होती है, दिमाग में नहीं।

    आज सोनू नोएडा में रहते हैं और अपनी सफलता से उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो छोटी-छोटी बाधाओं से घबराकर हार मान लेते हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि अगर मन में विश्वास और मेहनत करने का जज्बा हो, तो पूरी दुनिया आपके कदमों में हो सकती है।

    खेलो इंडिया के पदक विजेता और बिहार गोलबॉल टीम के कप्तान

    सोनू सिंह न केवल एक कुशल बैंक अधिकारी हैं, बल्कि एक उत्कृष्ट एथलीट भी हैं। उन्होंने साल 2023 में आयोजित पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बिहार को गौरवान्वित किया। इसके अलावा, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुके हैं।

    बिहार में पहली बार आयोजित नेशनल गोलबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने टीम की कप्तानी की और पिछले एक साल से टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि, नेशनल कैंप के लिए चुने जाने के बावजूद चोट (इंजरी) के कारण वे शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2026 में टोक्यो में होने वाले एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतना है।

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