प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के संसद भवन (संविधान सदन) में 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने दुनिया भर से आए विधायी प्रमुखों को संबोधित करते हुए भारतीय लोकतंत्र की जड़ों और इसकी विविधता पर जोर दिया।
विविधता: लोकतंत्र की असली ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता ही हमारे लोकतंत्र को जीवंत और शक्तिशाली बनाती है। उन्होंने रेखांकित किया कि विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं का समागम भारत की विधायी परंपरा को समृद्ध करता है।
- पीएम ने भारत को ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ बताते हुए कहा कि संवाद और चर्चा हमारे समाज के मूल संस्कार हैं।
- उन्होंने जोर दिया कि संसदीय संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना और समावेशी निर्णय लेना होना चाहिए।
समकालीन चुनौतियों पर मंथन
सम्मेलन में उन आधुनिक चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है जो आज के संसदीय कामकाज को प्रभावित कर रही हैं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): विधायी प्रक्रियाओं में AI के जिम्मेदार उपयोग और इसके साथ आने वाली सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श।
- सोशल मीडिया का प्रभाव: सांसदों की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक धारणा पर सोशल मीडिया के बढ़ते असर पर चर्चा।
- जनभागीदारी: मतदान से इतर नागरिकों को विधायी प्रक्रियाओं से जोड़ने की नवीन रणनीतियां।
सम्मेलन से जुड़ी अहम जानकारियां
| विवरण | जानकारी |
| प्रतिभागी | 42 देशों के 61 स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारी |
| अध्यक्षता | लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला |
| अवधि | 14 से 16 जनवरी 2026 |
| मेजबानी | भारत (16 साल बाद पुनः मेजबानी कर रहा है) |
इस सम्मेलन में पाकिस्तान और बांग्लादेश को आमंत्रित नहीं किया गया है। बांग्लादेश में वर्तमान में संसद भंग है, जबकि पाकिस्तान को प्रक्रियागत कारणों से दूर रखा गया है।
भारत की बढ़ती भूमिका
यह आयोजन वैश्विक स्तर पर संसदीय कूटनीति में भारत की बढ़ती धमक को दर्शाता है। उद्घाटन सत्र के बाद पीएम मोदी ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक संवाद भी किया।


