छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बुधवार, 14 जनवरी 2026 को नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। सुकमा के ‘गोगुंडा’ जैसे दुर्गम इलाके में सक्रिय 29 माओवादियों ने पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के आला अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
गोगुंडा का किला ध्वस्त
- रणनीतिक जीत: गोगुंडा इलाका अपनी कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण लंबे समय से माओवादियों के ‘दरभा डिवीजन’ का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था।
- बेस कैंप का प्रभाव: हाल ही में इस क्षेत्र में सुरक्षाबलों का नया बेस कैंप स्थापित किया गया है, जिसने नक्सलियों के सूचना तंत्र और रसद आपूर्ति को पूरी तरह तोड़ दिया है।
- मुख्य चेहरा: सरेंडर करने वालों में पोडियम बुधरा शामिल है, जो गोगुंडा इलाके में ‘दंडाकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संगठन’ (DAKMS) का अध्यक्ष था और उस पर ₹2 लाख का इनाम घोषित था।
पुनर्वास नीति और सरकारी दबाव
नक्सलियों के इस सामूहिक आत्मसमर्पण के पीछे दो प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
- ‘पूना मार्गेम’ पहल: सुकमा पुलिस की ‘पूना मार्गेम’ (नया रास्ता) मुहिम के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- मार्च 2026 की समयसीमा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और चारों तरफ से घिरने के खौफ ने नक्सलियों को हथियार डालने पर मजबूर किया है।
नक्सलवाद का गिरता ग्राफ
- आंकड़े: साल 2026 की शुरुआत से ही सरेंडर का सिलसिला तेज है। 7 जनवरी को सुकमा में 26 और 9 जनवरी को दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने हथियार डाले थे।
- पुनर्वास: आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक नक्सली को तत्काल सहायता राशि के रूप में ₹50,000 दिए गए हैं और सरकार की नीति के तहत उन्हें कृषि भूमि व कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।


