प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और पोंगल के पावन अवसर पर केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित उत्सव में भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने न केवल पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया, बल्कि पोंगल के वैश्विक महत्व और प्रकृति संरक्षण पर भी अपने विचार साझा किए।
गौ सेवा और सांस्कृतिक भागीदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने पोंगल उत्सव की शुरुआत ‘गौ सेवा’ (गाय की पूजा) के साथ की। उन्होंने गायों को चारा खिलाया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया, जो पोंगल उत्सव का एक अभिन्न अंग है। इसके साथ ही उन्होंने वहां उपस्थित कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोक संगीत का आनंद लिया।
पोंगल: एक वैश्विक उत्सव
सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल अब केवल तमिलनाडु या भारत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक उत्सव बन चुका है।
- एक भारत-श्रेष्ठ भारत: उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करते हैं। यह त्योहार हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और विविधता में एकता का संदेश देता है।
- वैश्विक पहचान: प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भर में भारतीय प्रवासी जिस गर्व के साथ पोंगल मनाते हैं, उसने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
प्रकृति और कृषि का सम्मान
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के महत्व को रेखांकित किया।
- अन्नदाता का आभार: उन्होंने कहा कि पोंगल हमारे किसानों (अन्नदाता) के कठिन परिश्रम और प्रकृति के आशीर्वाद का उत्सव है।
- पर्यावरण संरक्षण: प्रधानमंत्री ने लोगों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रहने और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
तमिल संस्कृति की सराहना
प्रधानमंत्री ने तमिल संस्कृति और भाषा की प्राचीनता व समृद्धि की प्रशंसा करते हुए कहा कि हर भारतीय को इस विरासत पर गर्व है। उन्होंने कहा कि पोंगल का उत्साह देश के कोने-कोने में महसूस किया जा रहा है, चाहे वह उत्तर में मकर संक्रांति हो या असम में बिहू।
यह कार्यक्रम न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन था, बल्कि इसने भारतीय परंपराओं के प्रति प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत लगाव और देश की सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के उनके निरंतर प्रयासों को भी दर्शाया।


