ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। देश की गिरती अर्थव्यवस्था और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे इस्लामी शासन को चुनौती दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का खुलकर समर्थन किया है, वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने आंदोलनकारियों को कड़ी सजा की चेतावनी दी है।
डोनाल्ड ट्रंप का ‘आजादी’ का वादा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए ईरान के लोगों के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया। उन्होंने लिखा, “ईरान आजादी की ओर देख रहा है, शायद जैसा पहले कभी नहीं देखा। अमेरिका मदद के लिए तैयार है!!!”
ट्रंप ने इससे पहले भी ईरानी शासन को चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, तो अमेरिका इसका “बेहद दर्दनाक” जवाब देगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन इस बार मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा।
खामेनेई की ‘मौत की सजा’ की चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल की साजिश करार दिया है।
- ‘अल्लाह का दुश्मन’: ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘मोहारेब’ (अल्लाह का शत्रु) माना जाएगा। ईरानी कानून के तहत इस अपराध की सजा सजा-ए-मौत है।
- कठोर कार्रवाई: खामेनेई ने सुरक्षा बलों को ‘उपद्रवियों’ और ‘दंगाइयों’ के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और विदेशी आकाओं को खुश करने का आरोप लगाया।
मौजूदा स्थिति और हताहतों की संख्या
ईरान में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे वहां की वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों (HRANA) के अनुसार:
- अब तक 116 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
- 2,600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
- प्रदर्शन अब ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं, जो दशकों में शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।


