भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) बनकर तैयार है और जल्द ही हरियाणा के सोनीपत-जींद रूट पर अपनी पहली व्यावसायिक दौड़ लगाएगी। भाजपा के आधिकारिक हैंडल से जारी जानकारी के अनुसार, भारत अब जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन के बाद इस अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है।
ट्रेन की मुख्य विशेषताएं और तकनीक
यह ट्रेन पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है और अत्याधुनिक इलेक्ट्रोकेमिकल फ्यूल-सेल तकनीक पर आधारित है।
- ‘जीरो एमिशन’: इस ट्रेन से धुआं नहीं, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) उत्सर्जित होती है। यह ‘जीरो आवाज और जीरो पॉल्यूशन’ के सिद्धांत पर काम करती है।
- रफ्तार और क्षमता: इसकी परिचालन गति 110 से 140 किमी प्रति घंटा के बीच होगी। वर्तमान में जींद से सोनीपत का सफर जो 2 घंटे में तय होता था, वह अब मात्र 1 घंटे में पूरा होगा।
- इंजन की शक्ति: इसमें 1200 HP के दो पावर कार इंजन लगे हैं, जो इसे ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाते हैं।
- स्वदेशी निर्माण: इसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार किया गया है।
रूट और इंफ्रास्ट्रक्चर
- रूट: यह ट्रेन सोनीपत-जींद के 89 किमी लंबे रूट पर चलेगी। इसके लिए जींद में देश का पहला हाइड्रोजन गैस प्लांट भी स्थापित किया गया है, जो पानी से हाइड्रोजन बनाने के लिए इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया का उपयोग करेगा।
- किफायती सफर: अनुमान है कि इस ट्रेन का किराया आम जनता के बजट के अनुकूल (₹5 से ₹25 के बीच) होगा।
- परीक्षण की स्थिति: ट्रेन का ट्रायल और सेफ्टी टेस्ट अंतिम चरण में है। रिपोर्टों के अनुसार, 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर इसका औपचारिक शुभारंभ हो सकता है।
विकसित भारत की ओर कदम
अजीत डोभाल के ‘ऑटोपायलट’ वाले बयान और प्रधानमंत्री मोदी के ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ मिशन के बीच यह ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। भारतीय रेलवे ने 2030 तक ‘नेट जीरो कार्बन एमिटर’ बनने का लक्ष्य रखा है, और यह हाइड्रोजन ट्रेन उस दिशा में एक मील का पत्थर है।


