ईरान में जारी ऐतिहासिक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक अनोखा और साहसी ट्रेंड ‘बगावत का चेहरा’ बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में ईरानी युवतियां सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की जलती हुई तस्वीरों (पोस्टर्स) से सिगरेट जलाती नजर आ रही हैं। यह कृत्य न केवल धार्मिक और राजनीतिक सत्ता को सीधी चुनौती है, बल्कि ईरान के सख्त सामाजिक नियमों के खिलाफ एक गहरा प्रतिरोध भी है।
क्यों हो रहा है ऐसा?
ईरान में सुप्रीम लीडर की तस्वीर जलाना एक गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए जेल या मौत की सजा तक हो सकती है। वहीं, सार्वजनिक रूप से महिलाओं का धूम्रपान करना भी सामाजिक रूप से प्रतिबंधित या हतोत्साहित किया जाता है। इन दोनों वर्जनाओं को एक साथ तोड़कर महिलाएं यह संदेश दे रही हैं कि अब उनमें “सुप्रीम खौफ” खत्म हो चुका है।
विरोध के मुख्य कारण:
- आर्थिक बदहाली: ईरानी रियाल का ऐतिहासिक गिरावट (1.4 मिलियन प्रति डॉलर) और 50% से अधिक की मुद्रास्फीति ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता: अनिवार्य हिजाब और महिलाओं पर थोपे गए कड़े प्रतिबंधों के खिलाफ गुस्सा अब सड़कों पर है।
- दमनकारी नीतियां: प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार की हिंसक कार्रवाई, जिसमें अब तक 60 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, ने आग में घी का काम किया है।
आंदोलन का नया मोड़
विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट जलाने का यह “बोल्ड” तरीका एक सोचे-समझे प्रतीकात्मक विरोध का हिस्सा है। खामेनेई की तस्वीर को माचिस की तरह इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि प्रदर्शनकारी अब इस सत्ता को कोई महत्व नहीं देते।
- इंटरनेट ब्लैकआउट: स्थिति को दबाने के लिए ईरान सरकार ने देशभर में इंटरनेट बंद कर दिया है, लेकिन फिर भी ये वीडियो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहे हैं।
- रजा पहलवी का आह्वान: ईरान के निर्वासित शहजादे रजा पहलवी के समर्थन और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी ने आंदोलनकारियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।
वैश्विक प्रतिक्रिया
इस ट्रेंड ने पूरी दुनिया का ध्यान ईरानी महिलाओं के संघर्ष की ओर खींचा है। यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने एक संयुक्त बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों के साहस की सराहना की है और ईरानी शासन द्वारा की जा रही हिंसा की कड़ी निंदा की है।
वर्तमान स्थिति: ईरान के 180 से अधिक शहरों में प्रदर्शन जारी हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं, और तेहरान के ग्रैंड बाज़ार जैसे महत्वपूर्ण केंद्र भी इस लहर की चपेट में हैं।


