एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देश की भविष्य की राजनीति पर एक बड़ा बयान दिया है। ओवैसी ने कहा कि भारत में वह दिन जरूर आएगा जब हिजाब पहनने वाली एक महिला देश की प्रधानमंत्री बनेगी। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की सियासत में उबाल ला दिया है।
ओवैसी का संबोधन: “हिजाब वाली बेटी बनेगी PM”
सोलापुर में एक विशाल रैली के दौरान समर्थकों को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा:
“इंशाअल्लाह, एक वक्त ऐसा आएगा जब इस देश की प्रधानमंत्री एक हिजाब पहनने वाली औरत होगी। हमारी बेटियां डॉक्टर बनेंगी, कलेक्टर बनेंगी और देश का नेतृत्व भी करेंगी। जो लोग उनके हिजाब से नफरत करते हैं, उन्हें एक दिन यह हकीकत स्वीकार करनी होगी।”
ओवैसी ने अपने भाषण में मुस्लिम समुदाय की शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि हिजाब किसी की प्रगति में बाधा नहीं है।
नितेश राणे का कड़ा जवाब: “यहाँ कोई जगह नहीं”
ओवैसी के इस बयान पर भाजपा विधायक नितेश राणे ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। राणे ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र की दिशा में बढ़ रहा है और यहाँ इस तरह की कट्टरपंथी सोच के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि ओवैसी जो सपने देख रहे हैं, वे कभी पूरे नहीं होंगे।
भाजपा नेता आर.पी. सिंह की प्रतिक्रिया
वहीं, दिल्ली में भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने इस मुद्दे पर अधिक लोकतांत्रिक दृष्टिकोण रखते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा, “भारत एक जीवंत लोकतंत्र है। यहाँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अंदर कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है, बशर्ते उसे जनता का बहुमत प्राप्त हो।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत हर वर्ग को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है, लेकिन धर्म आधारित राजनीति देश के लिए ठीक नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए ओवैसी अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पहचान की राजनीति (Identity Politics) का सहारा ले रहे हैं। वहीं, भाजपा इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताकर बहुसंख्यक वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।
हिजाब को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब देश के सर्वोच्च पद की बहस तक पहुँच गया है। जहाँ ओवैसी इसे सशक्तिकरण बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का जरिया मान रहे हैं।


