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    सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार पर सियासत; BJP ने नेहरू के पत्राचारों पर उठाए सवाल

    भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचारों और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर उनके कड़े विरोध पर तीखा प्रहार किया है। त्रिवेदी ने नेहरू की मानसिकता को भारत के सांस्कृतिक गौरव के लिए ‘भयावह’ और ‘खौफनाक’ करार दिया।

    लियाकत अली खान को पत्र और सोमनाथ का विरोध

    त्रिवेदी ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि अप्रैल 1951 में नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को एक पत्र लिखा था।

    • सम्मान और तुष्टिकरण: नेहरू ने उन्हें ‘माई डियर नवाबजादे’ संबोधित किया और सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार को गलत बताया।
    • दरवाजों का विवाद: नेहरू ने लियाकत अली को आश्वस्त किया कि गजनी द्वारा लूटे गए सोमनाथ मंदिर के दरवाजों को अफगानिस्तान से वापस लाने की बातें केवल अफवाह हैं।
    • विरोधाभास: त्रिवेदी ने भारत सरकार द्वारा ही प्रकाशित एल.एस. बख्शी की पुस्तक ‘महाराजा रणजीत सिंह’ का उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि महाराजा रणजीत सिंह ने काबुल विजय के बाद संधि में सोमनाथ के दरवाजे वापस करने की शर्त रखी थी।

    माओवादी विचारधारा के प्रति अनुराग

    डॉ. त्रिवेदी ने तत्कालीन चीन में भारतीय राजदूत के.एम. पणिक्कर और नेहरू के बीच हुए पत्राचार का भी खुलासा किया। पणिक्कर ने जो पत्र नेहरू को लिखा था, उसमें यह भाव था कि यदि चेयरमैन माओ को यह सब पता लगेगा तो उन्हें कैसा लगेगा? त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि नेहरू के लिए मुस्लिम लीगियों के प्रति अजीज मिजाज था, जबकि हिंदू मान-बिंदुओं पर उनके फैसलों की गाज गिरती थी।


    ‘जो तब था, वही अब है’

    सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू काल की मानसिकता की तुलना वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी वही विचारधारा हावी है:

    1. मुस्लिम लीगी मानसिकता से प्रेम: वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टिकरण।
    2. चीन से करार: विदेशी विचारधाराओं और शक्तियों के प्रति नरम रुख।
    3. सनातन पर प्रहार: हिंदू धर्म और सांस्कृतिक प्रतीकों का विरोध करना।
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