उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फायरब्रांड नेता विनय कटियार ने अयोध्या से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत देकर सियासी पारा बढ़ा दिया है। 6 जनवरी 2026 की ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, कटियार की सक्रियता ने उत्तर प्रदेश में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है।
चुनावी मैदान में वापसी की अटकलें
विनय कटियार, जो बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं और फैजाबाद (अब अयोध्या) से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं, पिछले कुछ समय से सक्रिय चुनावी राजनीति से दूर थे। हाल ही में यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ उनकी मुलाकात के बाद उनके अयोध्या से चुनाव लड़ने की चर्चाओं को बल मिला है।
- अयोध्या से जुड़ाव: कटियार का राजनीतिक आधार हमेशा से अयोध्या रहा है। राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा होने के बाद अब वे इसे एक नए ‘पॉलिटिकल नैरेटिव’ के रूप में पेश करना चाहते हैं।
- रणनीतिक महत्व: विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने पुराने और हिंदुत्ववादी चेहरों को फिर से मुख्यधारा में लाकर कैडर को एकजुट करना चाहती है।
हालिया विवादित बयान और रुख
विनय कटियार अपने कड़े और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने धन्नीपुर मस्जिद के निर्माण को लेकर एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अयोध्या में मस्जिद का कोई काम नहीं है।” हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा उन लोगों की ओर था जो शांति भंग करने की कोशिश करते हैं।
राजनीतिक करियर पर एक नज़र
| पद | विवरण |
| बजरंग दल | संस्थापक अध्यक्ष (1984) |
| सांसद (लोकसभा) | 1991, 1996 और 1999 (फैजाबाद निर्वाचन क्षेत्र) |
| सांसद (राज्यसभा) | 2012-2018 |
| संगठन | उत्तर प्रदेश बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष (2002-2004) |
यूपी की सियासत पर असर
विनय कटियार के मैदान में उतरने से न केवल अयोध्या बल्कि आसपास की सीटों (जैसे बस्ती और गोंडा) पर भी कुर्मी वोट बैंक और हिंदुत्ववादी मतदाताओं पर असर पड़ेगा। विपक्ष ने उनके संकेतों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “पुरानी ध्रुवीकरण की राजनीति” करार दिया है, जबकि बीजेपी समर्थकों के बीच इस खबर से उत्साह देखा जा रहा है।


