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    वेनेजुएला पर कब्जे के बाद भारत को धमकी, ट्रंप इन देशों पर भी बढ़ा रहे दबाव

    जनवरी 2026 की शुरुआत वैश्विक राजनीति के लिए अत्यंत उथल-पुथल भरी रही है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और वहां सैन्य हस्तक्षेप के बाद, अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Tariff) को और बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रंप की भारत को नई धमकी के मुख्य कारण

    एक्सपर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के इस कड़े रुख के पीछे कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण हैं:

    • रूसी तेल पर दबाव: ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पीएम मोदी एक ‘अच्छे इंसान’ हैं और वे जानते हैं कि मैं (ट्रंप) रूस से तेल खरीद को लेकर खुश नहीं हूं। अमेरिका चाहता है कि भारत पूरी तरह से रूसी तेल का आयात बंद कर दे ताकि रूस की युद्ध मशीनरी (यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में) को मिलने वाला फंड रुक सके।
    • टैरिफ को हथियार बनाना: ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल ही भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगा दिया था। अब इसे और बढ़ाने की धमकी दी जा रही है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तो इसे 500% तक करने का सुझाव दिया है ताकि भारत के लिए रूसी तेल खरीदना एक ‘मुश्किल विकल्प’ बन जाए।
    • वेनेजुएला के बाद ‘अमेरिका फर्स्ट’ की धमक: वेनेजुएला पर नियंत्रण के बाद ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका अपने हितों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश है। वहां अमेरिकी नियंत्रण के बाद ट्रंप की स्थिति ऊर्जा बाजार में मजबूत हुई है, और वे अब भारत जैसे बड़े खरीदारों को रूसी बाजार से हटाकर अमेरिकी या वेनेजुएला के तेल की ओर धकेलना चाहते हैं।

    भारत के लिए क्या है संकट?

    चुनौतीविवरण
    निर्यात पर असरटैरिफ बढ़ने से भारत के IT, टेक्सटाइल और स्टील निर्यात पर भारी बुरा असर पड़ेगा।
    ऊर्जा सुरक्षारूस भारत को सस्ता और रियायती कच्चा तेल दे रहा है। इसे बंद करने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
    कूटनीतिक दबावभारत हमेशा ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) की बात करता है, लेकिन ट्रंप का दबाव इस नीति के लिए बड़ी परीक्षा है।

    विशेषज्ञों की राय (Expert Analysis)

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह ‘लेन-देन वाली कूटनीति’ (Transactional Diplomacy) का हिस्सा है। वे भारत पर दबाव बनाकर एक ऐसी ट्रेड डील चाहते हैं जो पूरी तरह से अमेरिका के पक्ष में हो। वेनेजुएला में मादुरो के पतन के बाद ट्रंप का आत्मविश्वास बढ़ा है, और वे अब क्यूबा, ईरान और भारत जैसे देशों पर अपनी नीतियों को थोपने की कोशिश कर रहे हैं।

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