प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पर पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष लेख (OpEd) साझा किया है। उन्होंने कहा कि बार-बार के हमलों के बावजूद सोमनाथ का गर्व से खड़ा होना भारत माता की संतानों के अटूट साहस का प्रतीक है। पीएम के अनुसार, सोमनाथ की कहानी हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा के संकल्प की विजयगाथा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लेख के मुख्य बिंदु और सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक संदर्भ नीचे दिया गया है:
प्रधानमंत्री के लेख के मुख्य अंश
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में सोमनाथ को केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का केंद्र बताया है:
- साहस का प्रतीक: उन्होंने लिखा कि 1026 ईस्वी में हुए पहले बड़े आक्रमण (महमूद गजनवी द्वारा) का उद्देश्य न केवल धन लूटना था, बल्कि एक सभ्यता के आत्मविश्वास को तोड़ना था।
- पुनर्निर्माण की शक्ति: पीएम ने जोर दिया कि जितनी बार सोमनाथ को नष्ट करने की कोशिश हुई, उतनी ही भव्यता के साथ वह दोबारा खड़ा हुआ। यह भारतीयों की ‘विनाश से सृजन’ की शक्ति को दर्शाता है।
- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: उन्होंने वर्तमान पीढ़ी से आह्वान किया कि वे सोमनाथ के इतिहास से सीखें कि कैसे अपनी विरासत और पहचान की रक्षा की जाती है।
सोमनाथ: 1000 वर्षों का इतिहास (1026 – 2026)
सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्ष और पुनरुत्थान की एक अद्वितीय कहानी है:
| कालखंड | घटना |
| 1026 ई. | महमूद गजनवी ने मंदिर पर आक्रमण किया और उसे भारी क्षति पहुंचाई। |
| मध्यकाल | अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों ने भी मंदिर को निशाना बनाया। |
| 1947-1951 | भारत की आजादी के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प से आधुनिक मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू हुआ। |
| 2026 | पहले बड़े हमले के 1000 वर्ष पूरे होने पर इसे ‘सांस्कृतिक विजय’ के रूप में मनाया जा रहा है। |
वर्तमान महत्व
प्रधानमंत्री मोदी स्वयं सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उनके कार्यकाल में मंदिर परिसर का आधुनिक विस्तार हुआ है और इसे एक प्रमुख वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।


