सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। ताजा घटनाक्रम में, पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने भारत के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
‘एबेयंस’ (निलंबन) शब्द का कानूनी आधार नहीं
पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त ने जियो न्यूज के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत द्वारा समझौते को ‘एबेयंस’ (Abeyance) या ठंडे बस्ते में डालने का दावा कानूनी रूप से निराधार है। शाह के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संधि कानून में ‘एबेयंस’ जैसा कोई शब्द मान्यता प्राप्त नहीं है। यह संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी और इसे कोई भी पक्ष एकतरफा तरीके से निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि संधि के अनुच्छेद 12 के अनुसार, जब तक दोनों देश आपसी सहमति से बदलाव नहीं करते, यह संधि पूरी तरह प्रभावी रहेगी।
‘युद्ध की कार्रवाई’ की चेतावनी
पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को सीधे तौर पर उकसावा माना है। अधिकारी का कहना है कि यदि भारत पाकिस्तान की ओर आने वाले पानी के बहाव को रोकने या मोड़ने की कोशिश करता है, तो इसे ‘Act of War’ (युद्ध की कार्रवाई) माना जाएगा। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए सभी राजनयिक और कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। इससे पहले पाकिस्तानी सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) भी कह चुके हैं कि पानी के अधिकार पर किसी भी तरह का प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विवाद की पृष्ठभूमि (2025-26)
यह तनाव अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारत ने आतंकवाद के विरोध में ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’ की नीति अपनाते हुए संधि को स्थगित (Abeyance) करने का ऐलान किया था। जवाब में पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापार और हवाई क्षेत्र (Airspace) को बंद कर दिया और शिमला समझौते जैसे द्विपक्षीय समझौतों को भी निलंबित करने की धमकी दी।
मध्यस्थता की मांग
पाकिस्तान अब इस मुद्दे को लेकर विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत (PCA) का दरवाजा खटखटा रहा है। सिंधु जल संधि के तहत तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का अधिकांश पानी पाकिस्तान को आवंटित है, जबकि तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) पर भारत का पूर्ण अधिकार है।


