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    अमेरिकी की तानाशाही: वेनेजुएला पर किया कब्ज़ा, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व पत्नी सिलिया गिरफ्तार

    जनवरी 2026 की शुरुआत में एक बड़ी वैश्विक हलचल देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने और देश की कमान संभालने का दावा किया है। इस घटना ने न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बल्कि कानूनी गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है।

    ऑपरेशन और गिरफ्तारी की मुख्य बातें

    • अचानक हमला: अमेरिकी सेना (Delta Force) ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में बड़े पैमाने पर छापेमारी की और मादुरो व उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया।
    • न्यूयॉर्क में मुकदमा: मादुरो को अमेरिकी युद्धपोत के जरिए न्यूयॉर्क लाया गया है, जहाँ उन पर ‘नारको-टेररिज्म’ (मादक पदार्थों से जुड़ा आतंकवाद) की साजिश रचने का मुकदमा चलाया जाएगा।
    • ट्रंप का दावा: राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि वेनेजुएला में एक व्यवस्थित परिवर्तन होने तक अमेरिका वहां का शासन संभालेगा और उसके तेल संसाधनों का प्रबंधन करेगा।

    खड़े हो रहे प्रमुख कानूनी सवाल

    विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कार्रवाई की वैधता पर निम्नलिखित सवाल उठाए हैं:

    1. संप्रभुता का उल्लंघन: क्या कोई देश बिना युद्ध की घोषणा किए किसी दूसरे संप्रभु देश के राष्ट्रपति को उसके घर से गिरफ्तार कर सकता है? अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश के राष्ट्रप्रमुख को पद पर रहते हुए कानूनी सुरक्षा (Immunity) प्राप्त होती है।
    2. बिना कांग्रेस की अनुमति: अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस से अनुमति नहीं ली, जो संवैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग का संकेत देता है।
    3. कानून प्रवर्तन बनाम युद्ध: कानूनी प्रोफेसरों का तर्क है कि आप इसे ‘कानून प्रवर्तन अभियान’ (Law Enforcement Operation) कहकर फिर उसी आधार पर पूरे देश पर कब्जा नहीं कर सकते। ये दोनों चीजें कानूनी रूप से विरोधाभासी हैं।
    4. लोकतांत्रिक बदलाव की चुनौती: विशेषज्ञों का मानना है कि किसी ‘तानाशाह’ को हटाना आसान हो सकता है, लेकिन एक दूसरे देश में स्थिर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करना कानूनी और रणनीतिक रूप से अत्यंत जटिल कार्य है।

    वैश्विक प्रतिक्रिया

    वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इसे ‘साम्राज्यवादी हमला’ करार दिया है और मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकती है।

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