केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को असम के नगांव जिले के बोरदुवा में महान वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के पुनर्विकसित जन्मस्थान ‘बटद्रवा थान’ (Batadrava Than) का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि 15वीं सदी में संत शंकरदेव ने जिस ‘एक भारत’ और सांस्कृतिक एकता का आह्वान किया था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी विजन को आज धरातल पर उतार रहे हैं।
बटद्रवा थान: सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना
लगभग 227 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह पुनर्विकास परियोजना असम की आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- अतिक्रमण मुक्त भूमि: गृह मंत्री ने याद दिलाया कि पहले यह पवित्र स्थान घुसपैठियों के कब्जे में था। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 160 बीघा से अधिक भूमि को मुक्त कराया और वहां इस सांस्कृतिक परिसर का निर्माण किया।
- प्रमुख आकर्षण: इस परिसर में दुनिया का सबसे ऊंचा ‘गुरु आसन’, भव्य कला दीर्घाएं, और सत्रीय संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले अत्याधुनिक केंद्र बनाए गए हैं।
शाह के संबोधन की मुख्य बातें
- एकता का सूत्र: अमित शाह ने कहा, “श्रीमंत शंकरदेव ने पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम किया था। वे केवल असम के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के आध्यात्मिक नायक थे।”
- तुष्टीकरण बनाम विरासत: शाह ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक कांग्रेस सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इन पवित्र स्थानों को अतिक्रमणकारियों के हवाले छोड़ दिया था, लेकिन भाजपा सरकार ने विरासत और विकास का मेल पेश किया है।
- पूर्वोत्तर का विकास: उन्होंने जोर दिया कि मोदी सरकार के तहत असम अब उग्रवाद और आंदोलनों के दौर से बाहर निकलकर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो गया है।
गुवाहाटी में सुरक्षा और संस्कृति को नई सौगात
बटद्रवा थान के दौरे के बाद, अमित शाह ने गुवाहाटी में कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया:
- गुवाहाटी पुलिस आयुक्तालय: 111 करोड़ रुपये की लागत से बने नए पुलिस भवन का लोकार्पण।
- एकीकृत कमान एवं नियंत्रण प्रणाली (ICCS): 189 करोड़ रुपये की यह प्रणाली शहर में 2,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए सुरक्षा की निगरानी करेगी।
- ज्योति-विष्णु सांस्कृतिक परिसर: खानपारा में 5,000 लोगों की क्षमता वाले अत्याधुनिक ऑडिटोरियम का उद्घाटन।
- गृह मंत्री का यह दौरा न केवल असम के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है, बल्कि आने वाले चुनावों और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


