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    Success Story : असफलता के लंबे दौर को पीछे छोड़ा, वैष्णवी पॉल ने पूरा किया सपना

    उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की बेटी वैष्णवी पॉल ने सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) में अखिल भारतीय रैंक (AIR) 62 हासिल कर अपनी असफलता के लंबे दौर को पीछे छोड़ दिया है। उनका यह सफर दिखाता है कि बार-बार फेल होने पर भी हार न मानना और दृढ़ संकल्प ही सफलता की कुंजी है।

    संघर्ष भरा रहा प्रारंभिक सफर

    वैष्णवी का UPSC तक पहुँचने का सफर बेहद मुश्किलों भरा रहा। उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। वह प्रारंभिक परीक्षा (Pre) में एक, दो नहीं, बल्कि तीन बार असफल हुईं। लगातार तीन बार का असफल प्रयास किसी भी अभ्यर्थी के मनोबल को तोड़ने के लिए काफी होता है, लेकिन वैष्णवी ने अपने माता-पिता के सहयोग और मार्गदर्शन से खुद को संभाला। उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, जिन्हें उन्होंने ‘जीवन के संघर्ष’ बताया। इन संघर्षों और असफलताओं को भुलाकर उन्होंने चौथे प्रयास में एक नई शुरुआत की।

    चौथा प्रयास, शानदार सफलता

    चौथे प्रयास में वैष्णवी ने अपनी रणनीति बदली और नई ऊर्जा के साथ तैयारी शुरू की। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई:

    • चौथे प्रयास में उन्होंने न केवल प्रीलिम्स परीक्षा पास की, बल्कि मेन्स और इंटरव्यू की बाधा भी पार कर ली।
    • उन्होंने UPSC CSE 2024 में 62वीं रैंक हासिल कर अपनी सफलता की कहानी लिखी।

    परिवार का सहयोग और प्रेरणा

    वैष्णवी की सफलता में उनके परिवार, खासकर उनके पिता, डॉ. विजय कुमार पॉल, जो पेशे से डॉक्टर हैं, और उनकी माँ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके पिता ने हमेशा उन्हें प्रेरित किया और असफलताओं के बावजूद उनका साथ नहीं छोड़ा। वैष्णवी ने कहा कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें भरोसा दिलाया कि असफलताएँ केवल सीखने के लिए होती हैं, न कि रुकने के लिए।

    शिक्षा और पृष्ठभूमि

    वैष्णवी पॉल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोंडा से पूरी की। इसके बाद, उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना था। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद, उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में जाने के बजाय सीधे UPSC की तैयारी करने का कठिन निर्णय लिया।

    वैष्णवी पॉल की कहानी उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो UPSC की कठिन यात्रा के दौरान लगातार असफलताओं का सामना कर रहे हैं। उनकी सफलता सिद्ध करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास में निरंतरता हो, तो बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।

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