संसद के शीतकालीन सत्र से पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आज एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों के बीच सहमति बनाना था, लेकिन विपक्ष के तेवर और सरकार पर लगाए गए आरोपों से यह सत्र हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं।
कांग्रेस ने उठाए सुरक्षा, लोकतंत्र और प्रदूषण के मुद्दे
सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मीडिया को संबोधित करते हुए सत्र की अवधि और सरकार के रवैये पर सवाल उठाए “शीतकालीन सत्र आज सिर्फ़ 19 दिन का है, जिसमें से सिर्फ़ 15 दिन ही चर्चा हो पाएगी। यह शायद अब तक का सबसे छोटा शीतकालीन सत्र होगा… ऐसा लगता है कि सरकार खुद संसद को डिरेल करना चाहती है।”
- विपक्ष की 6 मुख्य मांगें:
- सुरक्षा का मुद्दा: “इस शीतकालीन सत्र में सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो… दिल्ली में विस्फोट हुआ, वह कहीं न कहीं हमारी कानूनी और गृह विभाग की विफलताओं का एक बहुत बड़ा प्रमाण है।”
- लोकतंत्र की सुरक्षा: गोगोई ने लोकतंत्र की सुरक्षा पर चर्चा की मांग की।
- स्वास्थ्य सुरक्षा (वायु प्रदूषण): “हमारी तीसरी मांग हमारी स्वास्थ्य से जुड़ी सुरक्षा से जुड़ी थी, जिस तरह से देश के हर कोने में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।”
- आर्थिक सुरक्षा: चौथी मांग आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी थी।
- प्राकृतिक सुरक्षा (आपदा): “पांचवां मुद्दा जो हमने उठाया वह प्राकृतिक सुरक्षा था। जिस तरह से बाढ़, भूस्खलन और तूफान आ रहे हैं, उसकी कोई तैयारी नहीं है।”
- विदेश नीति: “हमने अपनी विदेश नीति का मुद्दा भी उठाया, जिसे हम देख रहे हैं कि भारत दूसरे देशों के अनुसार अपनी विदेश नीति बना रहा है…”
सत्ता पक्ष का पलटवार: ‘विपक्ष ही तैयार नहीं’
केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार बहस के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सहयोग नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में अध्यक्ष सभी से अनुरोध करते हैं कि “सभी लोग सदन की कार्यवाही में सहयोग करें।” हमारे विरोधियों की जो मानसिकता देखी गई है, वे हमेशा चाहते हैं कि सदन ना चले, जबकि सदन विपक्ष के लिए ही होता है और उसमें उन्हें सरकार को घेरने का मौका मिलता है। हमारा विपक्ष ही तैयार नहीं है सत्ता पक्ष को घेरने के लिए।” इस सत्र में जहां विपक्ष सुरक्षा विफलताओं, वायु प्रदूषण और लोकतंत्र जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सत्ता पक्ष नियमों और प्रक्रियाओं के तहत विधायी एजेंडा को आगे बढ़ाने पर जोर देगा।


