कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच चल रहे अंदरूनी विवाद ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। इस खींचतान के बीच, कांग्रेस हाईकमान के स्पष्ट निर्देश के बाद, आज (शनिवार) सुबह शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आवास पर नाश्ते पर मुलाकात करने पहुंचे। यह बैठक राज्य की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह दोनों नेताओं के बीच ‘ढाई-ढाई साल’ के कथित सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले को लेकर चल रहे तनाव के बीच हो रही है।
हाईकमान का सख्त निर्देश
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने इस विवाद को अब और लंबा न खींचने का कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने दोनों ही प्रमुख नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
- एकजुट होकर काम करें: दोनों नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी बंद करने और राज्य सरकार को स्थिर रखते हुए एकजुट होकर काम करने के लिए कहा गया है। हाईकमान सोशल मीडिया पर चल रही जुबानी जंग से नाराज है।
- विवाद खत्म करें: पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं को दिल्ली आने से पहले आपसी मतभेदों को सुलझाने और एक आम सहमति वाला समाधान पेश करने को कहा है।
- अंतिम फैसला हाईकमान का: सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ने ही सार्वजनिक रूप से यह दोहराया है कि वे पार्टी हाईकमान (सोनिया, राहुल और खड़गे) के अंतिम फैसले को स्वीकार करेंगे।
नाश्ते पर हुई अहम चर्चा
सीएम आवास ‘कावेरी’ में हुई इस नाश्ते की बैठक को हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद सुलह की पहली कोशिश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि शिवकुमार ने इस दौरान मुख्यमंत्री पद के लिए ढाई साल के कथित वादे को याद दिलाया होगा। वहीं, सिद्धारमैया खेमा इस बात पर कायम है कि कोई ‘बाध्यकारी’ या लिखित समझौता नहीं हुआ था।
कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मुलाकात के बाद शिवकुमार आज ही दिल्ली के लिए रवाना हो सकते हैं, जहां वह हाईकमान से मिलकर इस मुद्दे पर निर्णायक बातचीत करेंगे। कर्नाटक सरकार के गठन के 18 महीने (ढाई साल का आधा कार्यकाल) पूरे होने के करीब आने के बाद यह विवाद चरम पर पहुंच गया है, जिससे हाईकमान पर जल्द फैसला लेने का दबाव है।


