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    67th Birthday: भारत को विश्व विजेता बनाया, लड़ना सिखाया, कपिल देव खिलाड़ी नहीं, थे प्रेरणा

    भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ‘6 जनवरी’ की तारीख सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। आज ‘हरियाणा हरिकेन’ के नाम से मशहूर और भारत को पहला विश्व कप जिताने वाले महान कप्तान कपिल देव अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। कपिल देव सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि वह प्रेरणा थे जिन्होंने एक साधारण टीम के भीतर ‘विश्व विजेता’ बनने का विश्वास जगाया और वैश्विक क्रिकेट की राजनीति का केंद्र इंग्लैंड से हटाकर भारत की ओर मोड़ दिया।

    1983 की जीत: जब ‘अंडरडॉग्स’ ने रचा इतिहास

    साल 1983 से पहले भारतीय टीम को वनडे क्रिकेट में एक कमजोर टीम माना जाता था। उस दौर में वेस्टइंडीज की टीम अजेय थी। कपिल देव के नेतृत्व में जब भारतीय टीम लॉर्ड्स के मैदान पर उतरी, तो किसी ने भी उन्हें खिताब का दावेदार नहीं माना था।

    • ज़िम्बाब्वे के खिलाफ ऐतिहासिक 175 :* जब टीम 17 रन पर 5 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी, तब कपिल देव ने ऐतिहासिक नाबाद 175 रनों की पारी खेली। इस पारी ने न केवल भारत को मैच जिताया, बल्कि टीम को यह अहसास कराया कि वे किसी भी परिस्थिति से बाहर निकल सकते हैं।
    • लॉर्ड्स की बालकनी में विश्व कप: फाइनल में महज 183 रनों का बचाव करते हुए भारत ने वेस्टइंडीज को 140 रनों पर ढेर कर दिया। कपिल देव द्वारा विव रिचर्ड्स का वह पीछे की ओर दौड़ते हुए पकड़ा गया कैच आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे निर्णायक पलों में से एक माना जाता है।

    क्रिकेट पॉलिटिक्स और भारत का उदय

    कपिल देव की इस जीत ने केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी क्रिकेट की दुनिया बदल दी:

    1. स्पॉन्सरशिप का सैलाब: 1983 की जीत के बाद भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई। कंपनियों ने क्रिकेट में पैसा लगाना शुरू किया, जिससे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड बनने की राह पर अग्रसर हुआ।
    2. एशिया में वर्ल्ड कप: कपिल देव की सफलता का ही परिणाम था कि 1987 में पहली बार विश्व कप इंग्लैंड से बाहर भारत और पाकिस्तान में आयोजित किया गया। इसने गोरे देशों (इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया) के एकाधिकार को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
    3. युवाओं के रोल मॉडल: कपिल देव ने साबित किया कि एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का, जिसकी अंग्रेजी भले ही कमजोर हो, अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता से दुनिया जीत सकता है। उनके बाद ही सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी जैसे सितारों की पीढ़ी तैयार हुई।

    एक अद्वितीय ऑलराउंडर का करियर

    कपिल देव के आंकड़े उनकी महानता की गवाही देते हैं। वे उस समय दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी बने जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 400 से अधिक विकेट (434) और 5000 से अधिक रन बनाए।

    प्रारूपमैचरनविकेटशतक
    टेस्ट13152484348
    वनडे22537832531

    सफलता का मंत्र: ‘बिलीव इन योरसेल्फ’

    कपिल देव की सबसे बड़ी सफलता यह थी कि उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के मन से गोरे देशों का खौफ निकाल दिया। उन्होंने सिखाया कि क्रिकेट केवल तकनीक का खेल नहीं, बल्कि जिगर का खेल है। आज जब हम टीम इंडिया को दुनिया के किसी भी कोने में जीतते हुए देखते हैं, तो उसकी नींव कपिल देव ने ही रखी थी।


    जन्मदिन विशेष: कपिल देव के बारे में एक रोचक तथ्य यह भी है कि वह अपने पूरे करियर में कभी भी रिटायर्ड हर्ट नहीं हुए और न ही कभी चोट के कारण किसी मैच से बाहर रहे, जो उनकी फिटनेस के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

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