भारत में एप्पल के आईफोन निर्माण के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी कामयाबी सामने आई है। साल 2026 की ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, एप्पल ने 2025 में भारत में 5.5 करोड़ (55 मिलियन) आईफोन असेंबल किए हैं, जो पिछले साल (2024) के 3.6 करोड़ यूनिट्स की तुलना में करीब 53% की बड़ी वृद्धि है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे के प्रमुख कारण और प्रभाव यहाँ दिए गए हैं:
1. वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका
एप्पल अब अपनी वैश्विक उत्पादन क्षमता का लगभग 25% हिस्सा (हर 4 में से 1 आईफोन) भारत में तैयार कर रहा है। यह इस बात का संकेत है कि कंपनी चीन पर अपनी निर्भरता कम कर भारत को अपने एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रही है।
2. सफलता के मुख्य कारण
- PLI स्कीम का असर: भारत सरकार की ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) योजना ने कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए आर्थिक रूप से प्रोत्साहित किया है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग लागत में आने वाली चुनौतियों को कम करने में मदद मिली है।
- चीन-अमेरिका ट्रेड वॉर: अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापारिक तनाव और टैरिफ (आयात शुल्क) के दबाव के कारण एप्पल ने अमेरिका के लिए बनने वाले फोन का उत्पादन चीन से हटाकर भारत में शिफ्ट किया है।
- पूर्ण सीरीज का निर्माण: पहली बार भारत में आईफोन 17 की पूरी सीरीज, जिसमें महंगे ‘प्रो’ (Pro) और ‘प्रो मैक्स’ (Pro Max) मॉडल भी शामिल हैं, का निर्माण किया जा रहा है।
3. स्थानीय साझीदारों की बड़ी भागीदारी
इस उत्पादन को गति देने में फॉक्सकॉन (Foxconn), टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और पेगाट्रॉन (Pegatron) जैसी बड़ी कंपनियों ने अहम भूमिका निभाई है। टाटा ग्रुप विशेष रूप से एक बड़े प्लेयर के तौर पर उभरा है, जिसके कारखाने भारत के कुल उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी निभाने की तैयारी में हैं।
4. चुनौतियाँ और भविष्य
हालाँकि भारत ने बड़ी प्रगति की है, लेकिन अभी भी चीन और वियतनाम की तुलना में यहाँ इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली और कंपोनेंट की लागत थोड़ी ज्यादा है। एप्पल और सरकार अब इस अंतर को पाटने के लिए अगली कड़ी की प्रोत्साहन योजनाओं (Incentives) पर चर्चा कर रहे हैं।
एप्पल न केवल भारत में आईफोन बना रहा है, बल्कि यहाँ एक बड़ा उपभोक्ता बाजार भी देख रहा है। पिछले एक साल में भारत में आईफोन की बिक्री 9 बिलियन डॉलर के पार पहुँच गई है, जिससे भारत अब दुनिया के लिए न केवल एक ‘फैक्ट्री’ बल्कि एक तेजी से बढ़ता हुआ ‘मार्केट’ भी बन गया है।


