पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है। 2 मार्च 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साझा हमलों का जवाब देते हुए मध्य पूर्व में स्थित 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है।
- लड़ाकू विमान दुर्घटना: कुवैत में अमेरिकी वायुसेना का एक F-15 स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान क्रैश हो गया है। ईरानी मीडिया का दावा है कि इसे मार गिराया गया है, जबकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार तकनीकी खराबी या मिसाइल हमले की आशंका जताई जा रही है।
- पायलट की स्थिति: सुखद बात यह रही कि पायलट समय रहते विमान से ‘इजेक्ट’ करने में सफल रहा और सुरक्षित है।
- अमेरिकी दूतावास पर हमला: कुवैत सिटी स्थित अमेरिकी दूतावास के पास धुआं उठते देखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी मिसाइलें दूतावास के निकटवर्ती क्षेत्रों में गिरी हैं।
27 सैन्य ठिकानों पर निशाना
ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने ‘ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4’ के तहत बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है। ईरान ने कुवैत, कतर, बहरीन, यूएई, इराक और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है। इजरायल के तेल नोफ एयरबेस और तेल अवीव स्थित सैन्य मुख्यालय (HaKirya) पर भी मिसाइलें दागी गई हैं।
अमेरिका और इजरायल को कितना नुकसान?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य सैन्य सूत्रों के अनुसार अब तक हुए नुकसान का आकलन इस प्रकार है:
| प्रभावित पक्ष | विवरण | नुकसान की सीमा |
| अमेरिकी सेना | कुवैत में रसद इकाई के पास हमला | 3 सैनिकों की मौत, 5 घायल |
| इजरायल | तेल अवीव और अन्य शहर | 1 महिला की मौत, 120+ घायल |
| यूएई (अबू धाबी) | मिसाइल के मलबे से नागरिक हताहत | 1 व्यक्ति की मौत, कई घायल |
| अमेरिकी नौसेना | ईरान का दावा (अमेरिका द्वारा खारिज) | कुछ जहाजों को निशाना बनाने का दावा |
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह भीषण तनाव तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इसके बाद ईरान ने “कठोर प्रतिशोध” की घोषणा करते हुए पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली हितों पर हमले तेज कर दिए हैं।
भविष्य की स्थिति
डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध अभी और कुछ हफ्ते चल सकता है और अमेरिकी हताहतों की संख्या बढ़ सकती है। खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए एयरस्पेस बंद कर दिए हैं।


