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    ईरान में फंसे 2000 कश्मीरी छात्र, JKSA ने PM को पत्र लिखकर लगाई गुहार

    ईरान में जारी भीषण सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच वहां पढ़ रहे करीब 2000 कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर इन छात्रों की तत्काल सुरक्षित वापसी के लिए गुहार लगाई है।

    परिजनों की बढ़ती बेचैनी

    ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाएं बाधित होने के कारण कश्मीर में रह रहे अभिभावक अपने बच्चों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। पिछले कई दिनों से छात्रों से बात न हो पाने के कारण परिवार गहरे मानसिक तनाव में हैं। छात्रों के हॉस्टल और शिक्षण संस्थान प्रदर्शनों के केंद्रों के पास स्थित होने के कारण उनके फंसने का खतरा बढ़ गया है।

    JKSA और राजनीतिक नेतृत्व की अपील

    • JKSA के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि वे विदेश मंत्रालय (MEA) को सक्रिय करें और तेहरान में भारतीय दूतावास के जरिए छात्रों के लिए एक सुरक्षित ‘निकासी योजना’ (Evacuation Plan) तैयार करें।
    • जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बात की है। विदेश मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
    • पीडीपी प्रमुख ने भी केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि ईरान में करीब 10,000 भारतीय हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, उनकी सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।

    भारतीय दूतावास की ‘एडवाइजरी’

    तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 14 जनवरी 2026 को एक ताजा परामर्श जारी किया है:

    1. देश छोड़ने की सलाह: सभी भारतीयों (छात्रों, पर्यटकों और व्यापारियों) को उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों के जरिए जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी गई है।
    2. सतर्कता: जो लोग वहां रुक रहे हैं, उन्हें प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने और दूतावास के संपर्क में रहने को कहा गया है।
    3. हेल्पलाइन: आपातकालीन सहायता के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी सक्रिय कर दी गई है।

    ईरान में वर्तमान स्थिति

    पहलूविवरण
    विरोध का कारणबढ़ती महंगाई, मुद्रा का गिरना और राजनीतिक सुधारों की मांग।
    प्रभावईरान के सभी 31 प्रांतों में हिंसा और प्रदर्शन फैल चुके हैं।
    हताहतमानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 2,500 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
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