भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अगस्त 2026 में श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम का एलान कर दिया है। इस 15 सदस्यीय टीम में सबसे चर्चित और चौंकाने वाला नाम सारांश जैन (Saransh Jain) का है। 33 वर्ष की उम्र में इंदौर (मध्य प्रदेश) के इस ऑलराउंडर को पहली बार राष्ट्रीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है।
31 मार्च 1993 को इंदौर में जन्मे सारांश जैन बाएं हाथ के उपयोगी बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ-स्पिनर हैं। उन्होंने साल 2014 के अंत में मध्य प्रदेश के लिए अपना प्रथम श्रेणी (First-Class) डेब्यू किया था। चंद्रकांत पंडित के मार्गदर्शन में रणजी ट्रॉफी जीतने वाली मध्य प्रदेश टीम के वे मुख्य सदस्य रहे हैं। लगभग 11 साल तक घरेलू क्रिकेट में लगातार पसीना बहाने के बाद अब जाकर उन्हें नीली जर्सी और टेस्ट कैप पहनने की दहलीज तक पहुंचने का मौका मिला है।
घरेलू क्रिकेट में कैसा रहा है प्रदर्शन?
सारांश जैन का रिकॉर्ड एक ऑलराउंडर के रूप में उनकी निरंतरता को साबित करता है:
- गेंदबाजी आंकड़े: 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 27.30 की औसत से 188 विकेट चटकाए हैं, जिसमें 10 बार पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा शामिल है।
- बल्लेबाजी रिकॉर्ड: निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 31.75 की औसत से 2,223 रन बनाए हैं, जिनमें 2 शतक और 14 अर्धशतक शामिल हैं।
कैसे मिला राष्ट्रीय टीम का बुलावा?
- इंडिया-ए दौरे पर शानदार प्रदर्शन: हाल ही में श्रीलंका-ए के खिलाफ गॉल में खेले गए अनौपचारिक टेस्ट में सारांश ने मैच में 6 विकेट चटकाए और नाबाद 70 रनों की पारी खेली। श्रीलंका की स्पिन-अनुकूल परिस्थितियों में उनके इस प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।
- वाशिंगटन सुंदर की चोट: हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण वाशिंगटन सुंदर पहले टेस्ट से बाहर हो गए हैं। चयनकर्ताओं को एक विशेषज्ञ ऑफ-स्पिनर और निचले क्रम में रन बनाने वाले खिलाड़ी की तलाश थी, जिसमें सारांश फिट बैठे।
- गंभीर की रणनीति: मुख्य कोच गौतम गंभीर की सोच टीम में गहराई (8वें-9वें नंबर तक बल्लेबाजी) बनाए रखने की रही है। रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार जैसे बाएं हाथ के स्पिनरों के साथ सारांश का ऑफ-स्पिन विकल्प टीम में विविधता लाता है।
33 साल की उम्र में मिली यह कामयाबी सारांश जैन के धैर्य, लगन और कभी हार न मानने वाले जज्बे की अनूठी मिसाल है।


