अमेरिका में 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर संभावित दावेदारों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा संकेत दिया है। कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से सांसद खन्ना ने कहा है कि वह 2028 की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह खुद राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ेंगे या किसी अन्य उम्मीदवार का समर्थन करेंगे।
राष्ट्रपति पद की दौड़ पर क्या बोले खन्ना?
खन्ना ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वह खुद चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं। साथ ही, यदि उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया तो वह दूसरे उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय रहेंगे। उनका कहना था कि वह डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए ऐसी नीतियों और विचारों को सामने रखने पर जोर देना चाहते हैं, जिनका लाभ कामकाजी और मध्यम वर्गीय परिवारों को मिल सके।
खन्ना के इस बयान से यह साफ है कि उन्होंने 2028 की राष्ट्रपति राजनीति से खुद को अलग नहीं किया है। हालांकि, इसे औपचारिक राष्ट्रपति अभियान की घोषणा नहीं माना जा सकता।
भारतीय मूल के पहले राष्ट्रपति की चर्चा
रो खन्ना भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी राजनेताओं में शामिल हैं। उनका जन्म 1976 में फिलाडेल्फिया में एक भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ था। उनके नाना अमरनाथ विद्यालंकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे थे। खन्ना ने शिकागो विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की। बाद में वह सिलिकॉन वैली में सक्रिय हुए और अमेरिकी राजनीति में आए।
वह बराक ओबामा के 2008 के राष्ट्रपति अभियान और बाद में ओबामा प्रशासन में भी काम कर चुके हैं। इसके बाद वह कांग्रेस के लिए चुने गए और कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
आर्थिक मुद्दों पर जोर
संभावित राष्ट्रपति अभियान की चर्चा के बीच खन्ना आर्थिक मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखते दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सार्वभौमिक चाइल्डकेयर को लेकर करीब 90 अरब डॉलर सालाना खर्च वाली योजना पेश करने की दिशा में काम किया है। उनका कहना है कि बच्चों की देखभाल की लागत अमेरिकी कामकाजी परिवारों के लिए बड़ी समस्या है।
खन्ना खुद अपनी आर्थिक सोच को “इकोनॉमिक पैट्रियटिज्म” कहते हैं। इसमें विनिर्माण, रोजगार और कामकाजी वर्ग के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अगस्त में उन्होंने यह भी कहा था कि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज के 2028 में चुनाव लड़ने का फैसला उनके अपने निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा।
इस तरह 2028 के चुनाव में रो खन्ना की भूमिका अभी खुली हुई है। उन्होंने राष्ट्रपति पद की दावेदारी से इनकार नहीं किया है, लेकिन फिलहाल उनकी ओर से कोई औपचारिक उम्मीदवारी घोषित नहीं की गई है। इसलिए 2028 में अमेरिका को भारतवंशी राष्ट्रपति मिलेगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है।


