संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय है। भारत के साथ ब्राजील, जर्मनी और जापान भी सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान, तुर्की और इटली समेत 12 देशों का समूह नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध कर रहा है। इस समूह को Uniting for Consensus (UfC) कहा जाता है, जबकि अनौपचारिक रूप से इसे ‘कॉफी क्लब’ के नाम से जाना जाता है।
क्या है कॉफी क्लब?
कॉफी क्लब उन देशों का समूह है जो UNSC में नए स्थायी सदस्य जोड़ने के बजाय निर्वाचित यानी गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की वकालत करता है। 24 सितंबर 2026 को UfC ने एक संयुक्त बयान में कहा कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला, लोकतांत्रिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लंबे कार्यकाल वाली रोटेशनल सीटों समेत निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाना बेहतर रास्ता है। समूह ने नए स्थायी सदस्यों के गठन का विरोध दोहराया।
इस समूह में पाकिस्तान, इटली और तुर्की के अलावा अर्जेंटीना, कनाडा, कोलंबिया, कोस्टा रिका, माल्टा, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, सैन मैरिनो और स्पेन शामिल हैं।
पाकिस्तान भारत के खिलाफ क्यों है?
भारत और पाकिस्तान के बीच क्षेत्रीय और राजनीतिक मतभेदों का असर UNSC सुधार की बहस पर भी दिखाई देता है। पाकिस्तान कॉफी क्लब का हिस्सा है और नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने का विरोध करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समूह में शामिल कई देशों की आपत्ति क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ी है। पाकिस्तान के लिए भारत का स्थायी सदस्य बनना दक्षिण एशिया में शक्ति-संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा है।
इटली और तुर्की की क्या वजह है?
इटली यूरोप में स्थायी सीट के सवाल पर अपने क्षेत्रीय हितों के कारण इस मॉडल का समर्थन करता है। यूरोप से जर्मनी UNSC में स्थायी सीट की मांग करने वाले G4 देशों में शामिल है, जबकि इटली नए स्थायी सदस्यों के बजाय क्षेत्रीय आधार पर रोटेशन वाली सीटों की व्यवस्था चाहता है। इसी तरह तुर्की भी स्थायी सदस्यता के विस्तार के बजाय अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व और निर्वाचित सीटों के मॉडल का समर्थन करता है।
यही कारण है कि भारत की दावेदारी का विरोध केवल भारत-पाकिस्तान विवाद तक सीमित नहीं है। UNSC सुधार के मुद्दे पर अलग-अलग देशों के क्षेत्रीय और संस्थागत हित भी जुड़े हुए हैं।
वीटो पावर पर भी मतभेद
मौजूदा UNSC में पांच स्थायी सदस्य—चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका—हैं और इन्हें वीटो का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।
कॉफी क्लब केवल नए स्थायी सदस्यों के गठन का विरोध नहीं करता, बल्कि वीटो व्यवस्था को भी बदलने की मांग करता है। उसके सितंबर 2026 के संयुक्त बयान में वीटो को समाप्त करने के समर्थन की बात कही गई है। साथ ही समूह ने तत्काल तौर पर बड़े अत्याचारों और युद्ध अपराधों जैसी परिस्थितियों में वीटो के इस्तेमाल को सीमित करने का समर्थन किया है।
भारत का क्या रुख है?
भारत का कहना है कि 1945 की परिस्थितियों के आधार पर बनी सुरक्षा परिषद आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती। भारत सदस्यता के विस्तार के साथ वीटो के मुद्दे पर भी व्यापक सुधार की जरूरत बताता रहा है। अप्रैल 2026 में भारत ने कहा था कि सुरक्षा परिषद की असंतुलित संरचना के दो प्रमुख पहलू सदस्यता और वीटो हैं।
इस तरह UNSC सुधार की बहस में एक तरफ भारत समेत G4 नए स्थायी सदस्यों की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कॉफी क्लब निर्वाचित और रोटेशन वाली सीटों को बढ़ाने का प्रस्ताव रख रहा है। यही मतभेद सुरक्षा परिषद के विस्तार पर चल रही वार्ता को जटिल बनाए हुए हैं।


