संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत की ओर से जवाब देने वाली राजनयिक पेटल गहलोत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भारत की स्थायी मिशन में फर्स्ट सेक्रेटरी गहलोत ने Right of Reply के तहत पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद, कश्मीर और पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर भारत का पक्ष रखा।
कौन हैं पेटल गहलोत?
पेटल गहलोत भारतीय विदेश सेवा यानी IFS की 2015 बैच की अधिकारी हैं। उनका जन्म नई दिल्ली में हुआ। उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की और इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति शास्त्र में परास्नातक किया। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 96 हासिल की थी।
गहलोत ने विदेश मंत्रालय में काम करने के अलावा विदेशों में भारतीय मिशनों में भी जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनके करियर में पेरिस स्थित भारतीय दूतावास की पोस्टिंग भी शामिल रही है। जुलाई 2023 में उन्हें न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में फर्स्ट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया। अप्रैल 2026 की मिशन की आधिकारिक स्टाफ सूची में भी उनका पद फर्स्ट सेक्रेटरी के रूप में दर्ज है।
यूएन में क्या बोलीं पेटल गहलोत?
26 सितंबर को पाकिस्तान के भाषण पर जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि भारत पाकिस्तान के बयानों को उसके रिकॉर्ड के संदर्भ में देखता है। उन्होंने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए और ओसामा बिन लादेन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने पर उसके परिणाम होंगे।
उन्होंने पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को भी खारिज करते हुए जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्थिति दोहराई। साथ ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। गहलोत ने पाकिस्तान के लोकतांत्रिक अधिकारों पर दिए गए बयानों पर भी सवाल उठाए।
पहले भी पाकिस्तान को दे चुकी हैं जवाब
पेटल गहलोत इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के बयानों का जवाब दे चुकी हैं। 2025 में भी उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन रुख पर भारत की ओर से Right of Reply का इस्तेमाल किया था। उस दौरान उन्होंने आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर से जुड़े पाकिस्तान के दावों पर भारत का पक्ष रखा था।
2026 में भी संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका पाकिस्तान को जवाब दर्ज है। जुलाई में उन्होंने सिंधु जल संधि के संदर्भ में भारत की स्थिति रखते हुए कहा था कि सीमा पार आतंकवाद की स्थिति में दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग प्रभावित होता है।
संगीत से भी है खास लगाव
कूटनीति के अलावा पेटल गहलोत की रुचि संगीत में भी रही है। उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक वह गायन और गिटार बजाने में रुचि रखती हैं और फ्रेंच भाषा में भी गाती हैं। उनकी शैक्षणिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के साथ कूटनीतिक अनुभव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष रखने वाली चर्चित अधिकारियों में शामिल किया है।


