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पाकिस्तान से भाग रहे निवेशक, मौलाना फजलुर रहमान ने मुनीर को घेरा, अमेरिका के कारण चीन का भरोसा उठा

पाकिस्तान में सेना की भूमिका, आर्थिक बदहाली और विदेशी निवेश को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उनके फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुंच रहा है। मौलाना ने दावा किया कि पाकिस्तान से निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान में निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ हुए समझौतों को लेकर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि पाकिस्तान के संसाधनों पर विदेशी नियंत्रण का रास्ता खोला जा रहा है।

‘चीन का भरोसा भी पाकिस्तान से उठ गया’

मौलाना फजलुर रहमान ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान के साथ जारी संघर्ष के कारण पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर व्यापार प्रभावित हुआ है। उनके मुताबिक, सीमा बंद होने से कारोबारियों, स्थानीय लोगों और आम परिवारों की आजीविका पर असर पड़ा है।

उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की नीतियों के कारण चीन जैसे पुराने सहयोगियों का भरोसा भी कमजोर हुआ है। मौलाना ने सवाल उठाया कि आखिर निवेशक पाकिस्तान से पैसा निकालकर अफगानिस्तान में निवेश क्यों कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निवेशक किसी भी देश में पैसा लगाने से पहले सुरक्षा, समझौतों में पारदर्शिता और कानून के शासन को देखते हैं। उनके अनुसार, यदि किसी देश में ये स्थितियां कमजोर हों, तो निवेशकों का विश्वास प्रभावित होना स्वाभाविक है। हालांकि, निवेशकों के पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर पलायन और अफगानिस्तान में निवेश बढ़ने के उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

FATA में आपातकाल को लेकर सेना पर निशाना

मौलाना ने पाकिस्तान के पूर्व संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र (FATA) में आपातकाल जैसी व्यवस्था लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे क्षेत्र के खनिज संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने की मंशा है।

उनका कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के नाम पर उठाए जा रहे कदमों से स्थानीय लोगों के अधिकार और संसाधनों पर उनका नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर किसी भी तरह का समझौता देश के हितों के खिलाफ होगा।

अमेरिका के साथ समझौतों पर भी उठाए सवाल

फजलुर रहमान ने असीम मुनीर पर अमेरिका के साथ किए गए समझौतों के जरिए पाकिस्तान के संसाधनों को विदेशी हितों के लिए खोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश के नाम पर यदि देश की जमीन और प्राकृतिक संपदा पर बाहरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन और रूस को इन कदमों पर आपत्ति है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से इस मामले में किसी आधिकारिक आपत्ति की पुष्टि नहीं हुई है।

सेना की भूमिका पर बढ़ती राजनीतिक बहस

मौलाना फजलुर रहमान इससे पहले भी पाकिस्तान में सेना के राजनीतिक प्रभाव और प्रांतीय अधिकारों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। हाल के दिनों में उन्होंने सैन्य नेतृत्व को चेतावनी देते हुए देश के इतिहास से सबक लेने की बात कही थी।

उनके ताजा बयान ऐसे समय आए हैं, जब पाकिस्तान आर्थिक दबाव, सुरक्षा चुनौतियों और अफगानिस्तान के साथ तनाव का सामना कर रहा है। इन आरोपों पर सेना प्रमुख असीम मुनीर की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। अब देखना होगा कि सरकार और सैन्य नेतृत्व इन सवालों का क्या जवाब देते हैं।

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