HomeHindi NewsBusinessधनतेरस से पहले खरीदारी का महामुहूर्त, कल रवि पुष्य नक्षत्र, सोना-चांदी से...

धनतेरस से पहले खरीदारी का महामुहूर्त, कल रवि पुष्य नक्षत्र, सोना-चांदी से लेकर वाहन, प्रॉपर्टी खरीदना होगा शुभ

दीपावली और धनतेरस से पहले खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए एक खास अवसर आने वाला है। रविवार, 1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद फलदायी और अक्षय तृतीया के समान महत्व वाला मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और स्थायित्व लेकर आती हैं। खास बात यह है कि इस दिन खरीदारी के लिए किसी अलग मुहूर्त की तलाश करने की जरूरत नहीं होगी। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, रवि पुष्य नक्षत्र में सोना-चांदी, वाहन, मकान, जमीन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। शादी-विवाह की तैयारियों में जुटे परिवारों के लिए भी यह दिन खरीदारी के लिहाज से खास रहने वाला है।

सुबह 10:37 बजे से शुरू होगा शुभ संयोग

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 1 नवंबर को सुबह 10 बजकर 37 मिनट से रवि पुष्य नक्षत्र का शुभ मुहूर्त शुरू होगा। यह 2 नवंबर की सुबह 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। इस दौरान खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत को शुभ माना गया है।

इसके अलावा एक नवंबर को सुबह 6:33 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेगा, जो दो नवंबर की सुबह 4:30 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। वहीं, शाम को 5:36 से 6:02 बजे तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा।

सोना-चांदी ही नहीं, वाहन और प्रॉपर्टी खरीदना भी शुभ

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और ज्योतिषाचार्य प्रो. बिहारी लाल शर्मा के अनुसार, रवि पुष्य नक्षत्र अबूझ मुहूर्त है। इसकी तुलना अक्षय तृतीया और भड़ली नवमी जैसे शुभ अवसरों से की जाती है। इस दिन सोना-चांदी, घर, जमीन और वाहन खरीदना अच्छा माना जाता है।

वहीं, बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. सुभाष पांडेय के मुताबिक, इस दिन घर की सजावट का सामान और नए कपड़े खरीदना भी शुभ रहेगा। इससे घर में समृद्धि और कार्यों में स्थायित्व आने की धार्मिक मान्यता है।

हालांकि, उन्होंने बताया कि आभूषण खरीदने के लिए चार नवंबर को भी विशेष मुहूर्त बन रहा है। छह नवंबर को धनतेरस के दिन सोना-चांदी और पीतल के बर्तन खरीदना शुभ रहेगा।

क्यों खास माना जाता है रवि पुष्य नक्षत्र?

वैदिक ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को विशेष स्थान दिया गया है। इसका संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है, जबकि इसका नक्षत्र स्वामी शनि हैं। रविवार के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग बनने पर इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में सोना, चांदी, वाहन, संपत्ति, नए व्यापारिक उपकरण, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक सामान, धार्मिक पुस्तकें और घर की उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ होता है। इस दौरान दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का भी विशेष महत्व बताया गया है।

बाजारों में बढ़ सकती है रौनक

धनतेरस और दीपावली से पहले रवि पुष्य नक्षत्र के संयोग से बाजारों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। ज्वेलरी, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान के कारोबारियों को इस अवसर से फायदा मिल सकता है। हालांकि, ज्योतिषीय शुभता धार्मिक मान्यता का विषय है। खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments