कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बैटमैन मास्क पहनने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इस अंदाज पर तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली कोई ‘गॉथम सिटी’ नहीं है और देश को किसी ‘डार्क सुपरहीरो’ या रॉबिन की जरूरत नहीं है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था।
कैसे शुरू हुआ बैटमैन वाला विवाद?
दरअसल, सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला था। इस दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में शामिल लोगों के बीच बैटमैन के मास्क बांटे। राहुल गांधी ने भी मास्क लेकर तस्वीर खिंचवाई। एक मौके पर वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बैटमैन का मास्क पहनने में मदद करते नजर आए।
इसके बाद कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने राहुल गांधी की मास्क वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। पोस्ट के साथ ‘बैटमैन मोड ऑन’ जैसा संदेश भी लिखा गया। देखते ही देखते यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
जयंत चौधरी ने क्यों किया गॉथम सिटी का जिक्र?
जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि दिल्ली गॉथम सिटी नहीं है और यहां किसी डार्क सुपरहीरो या रॉबिन की जरूरत नहीं है। उनका यह बयान बैटमैन के काल्पनिक शहर गॉथम सिटी के संदर्भ में था, जहां यह सुपरहीरो अपराध के खिलाफ लड़ता है।
जयंत की टिप्पणी को कांग्रेस के प्रदर्शन के तरीके और राहुल गांधी की बैटमैन वाली छवि पर राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह बयान राजनीतिक दलों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है।
पहले भी बैटमैन से जुड़ चुका है राहुल गांधी का नाम
राहुल गांधी और बैटमैन का संदर्भ पहली बार सामने नहीं आया है। अगस्त में इंस्टाग्राम पर छात्रों और युवाओं से बातचीत के दौरान राहुल गांधी से पूछा गया था कि क्या वह बैटमैन हैं। इस पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया था कि किसी ने उन्हें और बैटमैन को कभी एक ही कमरे में नहीं देखा है।
इसके बाद कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रचार में भी बैटमैन की छवि का इस्तेमाल किया गया। पार्टी से जुड़े पोस्टरों में राहुल गांधी को ‘रियल लाइफ बैटमैन’ के रूप में दिखाया गया था। अक्टूबर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मास्क का इस्तेमाल इसी सिलसिले की अगली कड़ी माना जा रहा है।
चुनावी मुद्दे से सोशल मीडिया की लड़ाई तक
बैटमैन मास्क का यह प्रसंग ऐसे प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जिसका मुख्य मुद्दा चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका थी। विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी विपक्ष के विरोध के तरीके पर निशाना साध रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में सोशल मीडिया, प्रतीकों और लोकप्रिय संस्कृति का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब इस विवाद का असर राजनीतिक बयानबाजी तक कितना आगे जाता है, इस पर नजर रहेगी।


