मध्य प्रदेश के उज्जैन में चल रही तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को धर्म के अर्थ और उसके जीवन में महत्व को लेकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल बुजुर्गों या धार्मिक कर्मकांड तक सीमित समझना सही नहीं है। धर्म व्यक्ति के अस्तित्व से जुड़ा विषय है और जीवन को दिशा देने का माध्यम है।
रिलीजन और धर्म एक नहीं
भागवत ने अपने संबोधन में ‘रिलीजन’ और धर्म के बीच अंतर समझाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर धर्म को अंग्रेजी के ‘रिलीजन’ शब्द के समान मान लिया जाता है, जबकि दोनों के अर्थ अलग हैं। उनके अनुसार अंग्रेजी में धर्म के लिए कोई ऐसा शब्द नहीं है जो उसके व्यापक अर्थ को पूरी तरह व्यक्त कर सके।
उन्होंने कहा कि ‘रिलीजन’ शब्द की उत्पत्ति ‘रिलीगो’ से मानी जाती है, जिसका अर्थ बांधने या एक अनुशासन में रखने से जोड़ा जाता है। इसके विपरीत भागवत ने कहा कि धर्म व्यक्ति को बांधता नहीं, बल्कि उसे मुक्त करता है और मोक्ष की दिशा में ले जाता है।
धर्म को युवाओं से जोड़ा
संघ प्रमुख ने कहा कि धर्म को केवल बुढ़ापे में पढ़ने या समझने की चीज मानना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म अस्तित्व के प्रारंभ से अंत तक बना रहता है। युवाओं के धर्म को लेकर चर्चा करने पर उन्होंने प्रसन्नता जताई और कहा कि इसे जीवन के हर चरण से जोड़कर समझने की जरूरत है।
भागवत ने युवाओं से अपने मन को नई सीख के लिए तैयार रखने की बात भी कही। उनके अनुसार किसी नए विचार या जिज्ञासा को समझने के लिए मन में पहले से जमा धारणाओं से कुछ समय के लिए मुक्त होना जरूरी है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का भी उल्लेख किया।
‘किसी को पीड़ा न देना सबसे बड़ा धर्म’
अपने संबोधन में भागवत ने धर्म को आचरण से जोड़ते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को पीड़ा न पहुंचाना धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जीवन में काम, अर्थ और मोक्ष की प्राप्ति को भी धर्म के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। उनका कहना था कि धर्म को केवल कर्मकांड के रूप में देखने के बजाय उसके मूल सिद्धांतों को समझना चाहिए।
युवा धर्म संसद में बड़ी भागीदारी
उज्जैन के देवास रोड स्थित गीता भवन में आयोजित युवा धर्म संसद में देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा, छात्र, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य शामिल हुए हैं। अमर उजाला के अनुसार कार्यक्रम में करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं और 300 से अधिक विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता तथा धर्माचार्य हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम में धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा, चरित्र निर्माण, राष्ट्र और समाज से जुड़े विषयों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा सूचना और विचारों के संघर्ष जैसे समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। युवा धर्म संसद का यह छठा संस्करण है। इससे पहले काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम में इसके आयोजन हो चुके हैं। अगले संस्करण का आयोजन द्वारका में प्रस्तावित है।


